राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अंतर्राज्यीय तस्करी गिरोहों की आहट पर हाई अलर्ट, मध्यप्रदेश वन विभाग ने बढ़ाई गश्त
मध्यप्रदेश के वन विभाग ने देश में घड़ियालों के सबसे प्रमुख संरक्षण केंद्र, राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में जलीय जीवों की सुरक्षा के उद्देश्य से हाई अलर्ट जारी किया है। अंतर्राज्यीय वन्यजीव तस्करों के गिरोह की संभावित गतिविधियों को देखते हुए चंबल नदी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बहुगुणित कर दिया गया है। विभाग ने अवैध रूप से मछली पकड़ने वालों पर कठोर कार्रवाई, संदिग्धों की जांच, नियमित गश्त और पड़ोसी राज्यों—उत्तरप्रदेश एवं राजस्थान—के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा ने राज्य स्तर पर यह अलर्ट जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अभयारण्य के सभी संवेदनशील नदी घाटों पर कड़ी नजर रखी जाए, ताकि घड़ियालों और दुर्लभ कछुओं के शिकार या तस्करी के किसी भी प्रयास को शुरुआत में ही नाकाम किया जा सके। इसके अलावा, तीनों पड़ोसी राज्यों के बीच गोपनीय सूचनाएं साझा करने और संयुक्त गश्त चलाने पर सहमति बनी है।
वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, शिवपुरी ने चंबल क्षेत्र से घड़ियाल और दुर्लभ कछुओं की तस्करी में शामिल एक संगठित अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया था। इसी के मद्देनजर यह सतर्कता बढ़ाई गई है।
ताज़ा दिशा-निर्देशों के अनुसार, चंबल अभयारण्य के घाटों पर नियमित के साथ-साथ अचानक निरीक्षण के लिए गश्त लगाई जाएगी। प्रत्येक घाट प्रभारी को मछली पकड़ने वाले सभी व्यक्तियों का एक आधिकारिक रिकॉर्ड रखने और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि का तुरंत सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से घड़ियालों और कछुओं के प्रजनन काल के दौरान संवेदनशील स्थानों पर चौबीसों घंटे पहरा रहेगा।
अवैध रूप से मत्स्याखेट में शामिल लोगों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। वन विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य संकटग्रस्त घड़ियालों की सबसे बड़ी प्राकृतिक शरणस्थली होने के साथ-साथ दुर्लभ कछुओं और डॉल्फिन जैसी समृद्ध जलीय प्रजातियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। इस बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए तीनों राज्यों के बीच अंतर्राज्यीय समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है।

