राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को सुदृढ़ करने भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न; पोषण सुरक्षा और तकनीक पर रहा जोर

मध्यप्रदेश राज्य खाद्य आयोग तथा राज्य नीति आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013: प्रगति, चुनौतियां और आगे की राह” 21-22 जुलाई 2026 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे हॉल में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस आयोजन में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों, विकास सहयोगियों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और विभिन्न राज्यों के खाद्य आयोगों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य साक्ष्य-आधारित संवाद और अनुभव-साझाकरण के जरिए खाद्य सुरक्षा कानून के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाना था।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को सामाजिक न्याय की आधारशिला करार दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में 28,000 से अधिक उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से 5 करोड़ से अधिक नागरिकों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने ‘राशन आपके द्वार’ योजना, एसएमएस अलर्ट, दिव्यांगजनों के लिए प्रॉक्सी व्यवस्था और बुजुर्गों के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में विशेष सहायता जैसी तकनीकी पहलों को रेखांकित किया।

सत्र के दौरान मध्यप्रदेश राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष प्रो. वी.के. मल्होत्रा और नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद ने देश के भावी खाद्य ढांचे पर विचार रखे। इसके पश्चात आयोजित तकनीकी सत्रों में नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. योगेश सूरी, यूएन वर्ल्ड फूड प्रोग्राम की सुश्री नोजोमी हाशिमोटो और आईसीएमआर-एनआईएन के डॉ. सी. साई राम सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इन चर्चाओं में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के पूर्ण कंप्यूटरीकरण, 96 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण होने, आइरिस-सक्षम ई-पोस मशीनों के उपयोग और ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना की प्रगति पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

संगोष्ठी के द्वितीय दिवस का केंद्र बिंदु जनस्वास्थ्य, अंतर-राज्यीय मॉडल और शिकायत निवारण तंत्र रहा। महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जी.वी. रश्मि, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वरिष्ठ संयुक्त निदेशक डॉ. अर्चना मिश्रा और यूनिसेफ के प्रतिनिधि श्री विलियम हैनलोन जूनियर ने एनएफएचएस-6 के आंकड़ों के हवाले से बच्चों में कुपोषण, स्टंटिंग और माताओं में एनीमिया जैसी गंभीर चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। विशेषज्ञों ने जीवन के “प्रथम 1,000 दिनों” की देखभाल, “कैश-प्लस” मॉडल तथा विभिन्न संबंधित विभागों के मध्य अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित करने के लिए एक विशेष सेल के गठन का सुझाव दिया।

इस अवसर पर पंजाब, मेघालय, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ के राज्य खाद्य आयोगों के अध्यक्षों ने अपने-अपने राज्यों में लागू डिजिटल गवर्नेंस, पोषण-केंद्रित पहलों और पारदर्शी शिकायत निवारण मॉडलों का प्रस्तुतीकरण दिया। समापन सत्र में अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी ने खाद्य सुरक्षा को केवल अनाज वितरण तक सीमित न रखकर पोषण सुरक्षा में बदलने की आवश्यकता जताई। उन्होंने दालों और मोटे अनाजों (मिलेट्स) को राशन प्रणाली में शामिल कर खाद्य टोकरी में विविधता लाने की विभागीय प्रतिबद्धता व्यक्त की।

सम्मेलन का समापन राज्य खाद्य आयोगों को सशक्त बनाने, लाभार्थी डेटाबेस को अद्यतन करने और खाद्य अधिकारों के मामले में शून्य-अस्वीकृति (नो-डिनायल) दृष्टिकोण अपनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग ने इन सभी अनुशंसाओं को व्यावहारिक नीतियों में परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।

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