मध्य प्रदेश पुलिस की त्वरित कार्रवाई: राजगढ़ में ठगी के 2.24 लाख रुपये बरामद, नर्मदापुरम में अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरफ्तार
मध्य प्रदेश में साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ितों को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से राज्यभर में सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी सिलसिले में राजगढ़ और नर्मदापुरम जिला पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में बड़ी सफलता अर्जित की है। पुलिस टीम न केवल पीड़ितों की पूरी रकम वापस कराने में सफल रही, बल्कि अन्य राज्यों से गिरोह का संचालन करने वाले आरोपियों को भी अपनी गिरफ्त में लिया। इन सफल कार्यवाहियों से स्पष्ट होता है कि यदि पीड़ित समय रहते शिकायत दर्ज कराएं और पुलिस विभिन्न वित्तीय तथा बैंकिंग संस्थानों से समन्वय बनाकर काम करे, तो साइबर ठगी की डूबी हुई राशि मिलने की उम्मीद काफी बढ़ जाती है।
राजगढ़ जिले में पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक ऑटो चालक से ठगे गए 60 हजार रुपये शत-प्रतिशत वापस करा दिए हैं। इस प्रकरण में जालसाजों ने स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित पर अश्लील वीडियो देखने का झूठा आरोप लगाया था और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उससे पैसे ट्रांसफर करवा लिए थे। राजगढ़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक विधि-विरुद्ध बालक को भी इस मामले में चिन्हित किया गया है। इसके अलावा, राजगढ़ में ही शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश में अधिक मुनाफे का लालच देकर की गई 1 लाख 64 हजार रुपये की दूसरी ठगी में भी पीड़ित की पूरी रकम बरामद करा ली गई। इसमें आरोपी ने डीमैट अकाउंट का एक्सेस हासिल कर धोखाधड़ी की थी, जिस पर पुलिस ने राजस्थान निवासी आरोपी के खिलाफ वैधानिक कदम उठाए हैं।
दूसरी तरफ, नर्मदापुरम जिले के देहात थाना क्षेत्र में एक महिला को ‘कस्टमर केयर’ प्रतिनिधि बनकर 99 हजार रुपये की चपत लगाई गई थी। जालसाजों ने खुद को ZODIAC कंपनी का प्रतिनिधि बताया और कपड़ों की बुकिंग की रकम रिफंड करने का झांसा देकर बैंक खाते से पैसे उड़ा लिए। नर्मदापुरम पुलिस और साइबर सेल ने तकनीकी साक्ष्यों तथा बैंक लेनदेन के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए केरल और महाराष्ट्र से दो अंतरराज्यीय ठगों को गिरफ्तार कर लिया।
इन सभी प्रकरणों में संबंधित जिला पुलिस, साइबर टीम और बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। नतीजतन, राजगढ़ के दोनों मामलों में कुल 2 लाख 24 हजार रुपये की पूरी रकम पीड़ितों को लौटाई जा सकी, वहीं नर्मदापुरम मामले में अंतरराज्यीय आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जारी है।
मध्य प्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन, बैंक विवरण या डीमैट अकाउंट की गोपनीय जानकारी साझा न करें। पुलिस ने साफ किया है कि भारत में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है; इसलिए खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या बैंक अधिकारी बताकर पैसे माँगने वालों से सतर्क रहें। किसी भी साइबर अपराध का शिकार होने पर नागरिक ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि ठगी गई राशि को समय रहते होल्ड और रिकवर कराया जा सके।

