कारगिल के अमर बलिदानियों को देश का नमन: शीर्ष नेतृत्व ने जवानों के शौर्य और समर्पण को किया याद

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश भर में भारतीय सशस्त्र बलों के वीर जवानों की बहादुरी और बलिदान को याद किया जा रहा है। इस मौके पर देश के सर्वोच्च पदों पर आसीन शीर्ष नेताओं—राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कारगिल के अमर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कारगिल के योद्धाओं का साहस, निष्ठा और राष्ट्रभक्ति भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास का अनुपम उदाहरण है। राष्ट्रपति के अनुसार, देश इन जांबाजों का हमेशा ऋणी रहेगा और उनकी वीरता की कहानियां आने वाली नस्लों को कर्तव्यनिष्ठ रहने की प्रेरणा देती रहेंगी।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि सशस्त्र बलों के अभूतपूर्व पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान ने ही कारगिल युद्ध में भारत की विजय की पटकथा लिखी थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह ऐतिहासिक जीत भारत की सैन्य क्षमता, संप्रभुता की सुरक्षा और अपनी सीमाओं की रक्षा करने के दृढ़ संकल्प का स्पष्ट प्रमाण है। देश इन वीरों और उनके परिवारों के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि राष्ट्र अपने उन जांबाज जवानों का आभारी है, जिन्होंने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारत की सुरक्षा सुनिश्चित की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जवानों का यह अदम्य साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण हमेशा से राष्ट्रीय गौरव का विषय रहा है और आगे भी देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 26 जुलाई 1999 को भारतीय शौर्य का स्वर्णिम दिन करार देते हुए कहा कि दुर्गम पहाड़ियों पर भारत माता का मस्तक ऊंचा रखने वाले वीरों का समर्पण सदैव वंदनीय रहेगा। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी वीर जवानों को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में दिया गया उनका बलिदान और योगदान इतिहास के पन्नों में हमेशा अमर रहेगा।



