उच्च शिक्षा में प्रदेश की बेटियों का दबदबा, सत्र 2026-27 में दर्ज हुआ 1.71 का रिकॉर्ड जेंडर पैरिटी इंडेक्स
प्रदेश में चालू शैक्षणिक सत्र 2026-27 के ई-प्रवेश अभियानों के दौरान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं का प्रतिनिधित्व नए शिखर पर पहुँच गया है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने हाल ही में जारी आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश ने स्नातक, स्नातकोत्तर और शिक्षक शिक्षा के सभी प्रमुख वर्गों में 1.71 का जेंडर पैरिटी इंडेक्स (जीपीआई) हासिल किया है, जिसके तहत औसतन हर 100 छात्रों पर 171 छात्राओं ने दाखिला लिया है।
विभागीय समीक्षा के दौरान मंत्री श्री परमार ने स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि केवल सांख्यिकीय वृद्धि नहीं, बल्कि राज्य में महिला सशक्तिकरण और समावेशी उच्च शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी मार्गदर्शन, बालिका प्रोत्साहन नीतियों और उच्च शिक्षा विभाग की पारदर्शी डिजिटल प्रवेश प्रणाली के चलते यह परिणाम संभव हो सका है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों, प्राचार्यों, प्राध्यापकों और प्रवेश अमले सहित सभी सफल छात्राओं एवं अभिभावकों के योगदान की सराहना की।
ई-प्रवेश प्रणाली के माध्यम से स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) और शिक्षक शिक्षा (एनसीटीई) श्रेणियों में कुल मिलाकर 5,29,484 विद्यार्थियों ने प्रवेश सुनिश्चित किया है। इनमें से 3,34,454 छात्राएँ हैं, जो कुल प्रवेश का 63.2 प्रतिशत हैं। वहीं छात्रों की संख्या 1,95,030 रही, जो 36.8 प्रतिशत के बराबर है। यह आँकड़ा साबित करता है कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में महिला नामांकन अब पुरुष नामांकन की तुलना में काफी आगे निकल चुका है।
स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों में कुल 3,64,867 विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ। इसमें छात्राओं की संख्या 2,21,529 (60.7 प्रतिशत) रही, जबकि छात्रों की संख्या 1,43,338 दर्ज की गई। यूजी स्तर पर प्रवेश आधारित जेंडर पैरिटी इंडेक्स 1.55 दर्ज किया गया, जो स्नातक स्तर की शिक्षा में बालिकाओं की निरंतर बढ़ती रुचि का प्रमाण है।
उच्चतर और व्यावसायिक शिक्षा के स्तर पर स्नातकोत्तर (पीजी) में 1,15,569 कुल नामांकनों में 80,175 छात्राएँ (69.4 प्रतिशत) तथा 35,394 छात्र शामिल रहे, जहाँ जीपीआई 2.27 (100 छात्रों पर 227 छात्राएँ) दर्ज हुआ। इसी तरह, एनसीटीई संचालित शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रमों में 49,048 दाखिलों में 32,750 छात्राएँ (66.8 प्रतिशत) और 16,298 छात्र दर्ज किए गए, जहाँ जीपीआई 2.01 (100 छात्रों पर 201 छात्राएँ) रहा। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि उच्चतर एवं शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी छात्राएँ अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।


