होर्मुज संकट और वैश्विक संकेतों के साए में सेंसेक्स-निफ्टी की सुस्त शुरुआत, आईटी और ऑटो में बढ़त

सोमवार को सप्ताह के शुरुआती कारोबारी सत्र में भारतीय इक्विटी बाजार में सीमित दायरे में कारोबार देखा गया, जहां बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी50 नाममात्र की तेजी के साथ खुले। निवेशकों ने अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से जुड़ी वार्ताओं पर बनी अनिश्चितता के कारण सतर्क रुख अपनाया।
व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अपने पूर्व बंद 78,499.17 अंक के मुकाबले बेहद मामूली 2.41 अंक की चढ़त दर्ज करते हुए 78,501.59 अंक पर खुला। इसी क्रम में, एनएसई निफ्टी50 ने भी पिछले बंद 24,570.65 अंक से 10.59 अंक ऊपर उठकर 24,581.25 अंक पर दिन के कारोबार की शुरुआत की।
सत्र के शुरुआती दौर में निवेशकों की लिवाली से सेंसेक्स में 177 अंकों (0.22 फीसदी) की तेजी आई और यह 78,676 के स्तर को छूने में सफल रहा। इसी दौरान निफ्टी50 भी 0.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,620 के आंकड़े तक पहुंचा। हालांकि, शुरुआती तेजी टिक नहीं सकी और बाद के सत्र में बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणियों में अलग-अलग रुझान नजर आया; जहां निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने में सफल रहा, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.13 प्रतिशत की गिरावट आई। सेक्टरवार प्रदर्शन में आईटी, प्राइवेट बैंक, ऑटो, फार्मा, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स हरे निशान में रहे। दूसरी तरफ, पीएसयू बैंकिंग, मीडिया, एफएमसीजी और ऑयल एवं गैस से जुड़े सेक्टरों में मंदी का रुख रहा और इनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
निफ्टी50 में शामिल प्रमुख कंपनियों में टाइटन, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, ग्रासिम, सिप्ला, इंफोसis और ट्रेंट के शेयर तेजी दर्ज करते हुए शीर्ष लाभ कमाने वाले शेयर बने। वहीं दूसरी ओर, बिकवाली के चलते एसबीआई, एचडीएफसी लाइफ, हिंडाल्को, पावरग्रिड, इटरनल तथा रिलायंस के शेयरों में गिरावट आई और ये इंडेक्स के सबसे बड़े घाटे वाले शेयर रहे।
वैश्विक मोर्चे पर, होर्मुज जलमार्ग से माल ढुलाई पर असमंजस कायम है, क्योंकि तेहरान ने वाशिंगटन के साथ सीधी बातचीत के दावों को खारिज कर दिया है। हालांकि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट द्वारा पिछले हफ्ते दिए गए बयानों से बाजार में समझौते की सकारात्मक उम्मीद जगी थी, परंतु अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया रुख से अनिश्चितता बढ़ गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ महज “आंशिक वार्ता” कर रहा है और उस पर आर्थिक दबाव की नीति जारी रखने का इरादा रखता है।



