अमेरिका में वीजा विस्तार की प्रक्रिया हुई महंगी, कंपनियों को देना होगा 4,500 डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क

अग्रणी कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों के एच-1बी और एल-1 वीजा का विस्तार कराने पर अब अमेरिका में अतिरिक्त शुल्क देना होगा, जिससे आईटी एवं वैश्विक सेवा प्रदाताओं की आव्रजन लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। अमेरिकी गृह विभाग की घोषणा के अनुसार, 9 सितंबर से लागू होने वाले इस नियम के तहत एच-1बी वीजा विस्तार पर 4,000 डॉलर और एल-1 वीजा विस्तार पर 4,500 डॉलर का शुल्क तय किया गया है।
यह नियम उन सभी नियोक्ताओं पर प्रभावी होगा जिनके पास 50 से अधिक कर्मचारी हैं और जिनका आधा से अधिक स्टाफ एच-1बी या एल-1 जैसे गैर-प्रवासी वीजा पर निर्भर है। चूंकि भारतीय आईटी और कंसल्टेंसी कंपनियां बड़े पैमाने पर ऑनशोर-ऑफशोर कार्यबल मॉडल का उपयोग करती हैं, इसलिए उन पर इस नीतिगत बदलाव का सीधा वित्तीय असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। पहले यह शुल्क केवल नए आवेदनों या नौकरी बदलने के मामलों तक सीमित था।
क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय के बाद प्रौद्योगिकी और आईटी कंपनियों के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय संस्थानों के लिए आव्रजन प्रायोजन की प्रक्रिया खर्चीली हो जाएगी। यदि कोई कंपनी एक ही कर्मचारी के वीजा को बार-बार विस्तारित करती है, तो उसे हर बार यह शुल्क चुकाना होगा। हालांकि, जिन आवेदनों के माध्यम से केवल जानकारी संशोधित की जा रही है और वीजा विस्तार की मांग नहीं की गई है, उन्हें इस अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखा गया है।
प्रशासनिक स्तर पर इस विसंगति को दूर करने और प्रत्येक विस्तार आवेदन पर शुल्क लगाने से अमेरिकी सरकार को सालाना लगभग 15.73 करोड़ डॉलर की आय होने की उम्मीद है। इस राशि का उपयोग अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (सीबीपी) की हवाई और समुद्री बायोमेट्रिक प्रवेश-निकास प्रणाली को वित्तीय मजबूती देने के लिए किया जाएगा, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं का प्रमुख हिस्सा है।
दिसंबर 2015 में अमेरिकी कांग्रेस ने बायोमेट्रिक प्रवेश-निकास कार्यक्रमों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुराने शुल्क के स्थान पर ‘9-11 प्रतिक्रिया और बायोमेट्रिक प्रवेश-निकास शुल्क’ का प्रावधान किया था, जिसके तहत अब यह नया दायरा बढ़ाया गया है।



