80वां स्वतंत्रता दिवस: ‘सप्तधारा’ रणनीति और स्वदेशी रक्षा तकनीक से भारत बनेगा ग्लोबल सप्लायर, लाल किले से पीएम मोदी का संदेश

लाल किले से शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामरिक स्वावलंबन को देश का सर्वोच्च राष्ट्रीय दायित्व करार दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत मात्र एक उपभोक्ता बाजार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि देश को आधुनिक रक्षा तकनीक के प्रमुख निर्यातक के रूप में अपनी पहचान बनानी होगी।
संबोधन के दौरान प्राचीन ‘सप्त सिंधु’ की विरासत का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘सप्त शक्ति’ (सप्तधारा) का विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस रणनीति की पांचवीं प्रमुख धारा ‘रक्षा शक्ति’ है। राष्ट्रीय सुरक्षा में साइबर स्पेस के बढ़ते महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने डिजिटल सीमाओं और वैश्विक साइबर सुरक्षा के लिए भारतीय युवाओं की तकनीकी दक्षता के सक्रिय उपयोग पर विशेष जोर दिया।
आयात पर निर्भरता की प्रवृत्ति से दूरी बनाने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बाहरी स्रोतों से मिलने वाली त्वरित सुविधाएं देश के वास्तविक सामर्थ्य को विकसित नहीं करतीं। उन्होंने हाइपरसोनिक तकनीक, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के निर्माण में स्वदेशी नेतृत्व की वकालत की। उन्होंने रेखांकित किया कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के माध्यम से आत्मनिर्भरता का संकल्प जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।
सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि समकालीन दौर में युद्ध के तौर-तरीके बदल चुके हैं और आर्थिक अवसंरचनाएं नए निशाने पर हैं। उन्होंने बताया कि ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ पर कार्य तीव्रता से जारी है। इसके साथ ही, पारंपरिक सिविल डिफेंस प्रणाली को आधुनिक बनाते हुए एक सशक्त स्वयंसेवी बल तैयार किया जा रहा है।
पिछले 12 वर्षों के दौरान रक्षा क्षेत्र में आए आमूलचूल बदलावों को रेखांकित करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि रक्षा उत्पादन में करीब 4 गुना और रक्षा निर्यात में लगभग 50 गुना की वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय हथियार विश्व के करीब 100 देशों में अपनी पहुंच बना चुके हैं। उन्होंने एनडीए से उत्तीर्ण महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि नारी शक्ति पूरे आत्मविश्वास के साथ सैन्य मोर्चे पर नेतृत्व प्रदान कर रही है।



