ईरान-अमेरिका तनाव से कच्चे तेल में उछाल, भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी टूटे

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। ईरान और अमेरिका के मध्य बढ़ते गतिरोध तथा शांति समझौते की संभावनाएं क्षीण होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिसका सीधा दबाव भारतीय इक्विटी बाजारों पर देखा गया।
शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 365 अंक यानी 0.47 प्रतिशत लुढ़ककर 77,362 के स्तर पर आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 76 अंक अथवा 0.31 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,211 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन की बात करें तो आईटी शेयरों पर सबसे अधिक दबाव दर्ज किया गया, जहां निफ्टी आईटी सूचकांक में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम में 0.62 प्रतिशत और रियल्टी सेक्टर में 0.40 प्रतिशत की मंदी रही। वित्तीय सेवाओं, निजी बैंकों, मीडिया, धातु और एफएमसीजी क्षेत्र के सूचकांक भी लाल निशान में रहे। हालांकि, बाजार की इस कमजोरी के बीच ऑटो इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत और सरकारी बैंकों (पीएसयू बैंक) में 0.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
ऊर्जा आपूर्ति को लेकर यह अनिश्चितता तब और बढ़ गई जब ईरान के आक्रामक रुख की खबरें सामने आईं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया। इसके चलते ब्रेंट कच्चा तेल 0.60 प्रतिशत की तेजी के साथ 91 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 1 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 85.37 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ अमेरिका की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड का 4.73 प्रतिशत तक पहुंचना निकट भविष्य में विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुझान को प्रभावित कर सकता है। इसके बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती और कंपनियों की आय में सुधार के संकेत बाजार को सहारा देने में सक्षम हैं। बाजार के रुझानों के अनुसार घरेलू संस्थागत निवेशक गिरावट के दौरान लिवाली जारी रख सकते हैं, जबकि छोटे निवेशक गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में लंबी अवधि के लिए चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपना सकते हैं।



