अमेरिका में ग्रीन कार्ड के नियम सख्त: ट्रंप प्रशासन ने ‘पब्लिक चार्ज’ का दायरा बढ़ाया, 18 सितंबर से लागू होगा नया प्रावधान

अमेरिका में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) प्राप्त करने के इच्छुक प्रवासियों के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। ट्रंप प्रशासन ने ‘पब्लिक चार्ज’ (सरकारी सहायता पर निर्भरता) के दायरे का विस्तार करते हुए नए दिशा-निर्देश तय किए हैं, जो 18 सितंबर से प्रभावी होंगे। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) द्वारा अंतिम रूप दिए गए इस नियम के तहत सरकारी स्वास्थ्य सेवा, मुफ्त राशन (फूड स्टैम्प) अथवा किसी भी प्रकार की वित्तीय मदद लेने वाले आवेदकों के आवेदन रद्द किए जा सकेंगे।
इस नीतिगत बदलाव का सीधा असर ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ेगा। पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत केवल दो विशिष्ट परिस्थितियों में ही आवेदन निरस्त किया जाता था—जिनमें निर्वाह भत्ते के रूप में मिलने वाली नकद वित्तीय सहायता और सरकारी खर्चे पर किसी आश्रय स्थल या संस्थान में लंबी अवधि तक रहना शामिल था।
एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि यूएससीआईएस अधिकारी अयोग्यता निर्धारण के लिए आवेदक की समग्र स्थिति का मूल्यांकन करेंगे। इसके अंतर्गत यह परखा जाएगा कि आवेदक भविष्य में नकद मदद, आवास सुविधा, मुफ्त खाद्य सहायता अथवा उच्च शिक्षा के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकता है या नहीं।
गृह सुरक्षा विभाग ने बाइडन प्रशासन द्वारा वर्ष 2022 में तय किए गए ‘पब्लिक चार्ज’ नियमों को निरस्त करते हुए यह नया मसौदा तैयार किया है। इस नियम की घोषणा 16 जुलाई को की गई थी, जिसके बाद 20 जुलाई को इसे ‘फेडरल रजिस्टर’ में प्रकाशित किया गया। यह नियम 18 सितंबर या उसके बाद डाक अथवा ऑनलाइन माध्यम से जमा किए जाने वाले ‘फॉर्म आई-485’ (स्थायी निवास या स्थिति समायोजन आवेदन) पर लागू रहेगा।
नए मानकों के अनुसार, आव्रजन अधिकारियों को आवेदक की आयु, स्वास्थ्य स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि, वित्तीय हालात, शैक्षणिक योग्यता और उसके आश्रितों द्वारा ली गई सरकारी सुविधाओं के आधार पर निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त होगा। यदि अधिकारी को यह संदेह होता है कि आवेदक भविष्य में सरकार पर आश्रित हो सकता है, तो वह उससे ‘पब्लिक चार्ज बॉन्ड’ जमा कराने की मांग भी कर सकता है।
आव्रजन मामलों के विधि विशेषज्ञ साइरस मेहता और दमीरा जानातोवा ने अपने विश्लेषण में उल्लेख किया है कि इस नए नियम के प्रभावी होने से अधिकारियों को ग्रीन कार्ड आवेदनों को खारिज करने की और अधिक व्यापक शक्तियां प्राप्त हो जाएंगी।



