प्रधानमंत्री जन धन योजना के 12 साल: 3.17 लाख करोड़ रुपये की बचत के साथ बदली देश की बैंकिंग व्यवस्था
देश के व्यापक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ ने शुक्रवार को अपनी यात्रा के सफल 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस दूरगामी योजना ने देश के करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर उनके आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मायगव इंडिया के संदेश को साझा करते हुए योजना के परिवर्तनकारी परिणामों की सराहना की। मायगव इंडिया के अनुसार, पूर्व में आम नागरिकों के लिए बैंक की पहुंच भौगोलिक दूरी और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करती थी, किंतु इस योजना की शुरुआत के बाद बैंकिंग सेवाएं देश के हर कोने और हर वर्ग तक सुलभ हो पाई हैं।
वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में उल्लेख किया कि 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई यह योजना आज दुनिया भर में वित्तीय समावेशन के सबसे बड़े मॉडल के रूप में स्थापित हो चुकी है। 12 वर्षों के इस सफर में जन धन योजना ने भारत के समूचे बैंकिंग ढांचे को नया रूप दिया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 59.09 करोड़ से ज्यादा खाते खोले जा चुके हैं और इनमें 3.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि इसमें 56 फीसदी हिस्सेदारी महिला खाताधारकों की है, जबकि 78 फीसदी खाते ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में खोले गए हैं।
डिजिटल व्यवस्था और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए खाताधारकों को 41 करोड़ से अधिक मुफ्त रूपे डेबिट कार्ड दिए गए हैं। इस कार्ड के साथ 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा शामिल है, साथ ही खाताधारकों को वित्तीय जरूरत के समय 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी दी जाती है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह योजना समाज के पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को पूर्ण वित्तीय सुरक्षा देने का माध्यम बनी है। खातों के माध्यम से लाभार्थियों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी प्रमुख सामाजिक योजनाओं से जोड़ा गया है, जिससे असंगठित क्षेत्र के कामगारों को आवश्यक सुरक्षा मिल रही है।


