एससीओ बैठक के इतर पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात, आर्मेनियाई प्रधानमंत्री से भी रक्षा व व्यापार पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन के मंच पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। पश्चिम और मध्य एशिया के कूटनीतिक परिदृश्य में इस संवाद को खासा अहम माना जा रहा है।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान से मुलाकात कर दोनों देशों के रिश्तों की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने रक्षा, आर्थिक साझेदारी, दवा उद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शिक्षा के क्षेत्र में तालमेल बढ़ाने पर विमर्श किया। पश्चिम एशिया के ताजा हालात सहित कई समसामयिक वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आर्मेनिया के साथ भारत की साझेदारी को नए आयाम देने के संकल्प को दोहराया।

ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने सम्मेलन में शामिल होने से पूर्व अपनी नीति स्पष्ट करते हुए कहा था कि उनका देश युद्ध से बचना चाहता है, किंतु किसी भी आक्रामकता का पूरी मजबूती और संकल्प से जवाब दिया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रीय अशांति को सभी पक्षों के लिए हानिकारक बताते हुए साझे आर्थिक व सुरक्षा लक्ष्यों के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने एससीओ मंच को विविध स्वतंत्र आवाजों का प्रतिनिधित्व करने वाला बताया और ऐतिहासिक परंपराओं के अनुरूप सह-अस्तित्व और विकास के लिए संवाद को आवश्यक ठहराया।

चालू वर्ष के मार्च माह में भी दोनों शीर्ष नेताओं के मध्य संवाद हुआ था। उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया था। भारत ने ईरान समेत पूरे क्षेत्र में अपने प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा ऊर्जा और जरूरी सामान के अबाध परिवहन को प्राथमिकता के तौर पर रेखांकित किया था।

शिखर सम्मेलन के कार्यक्रमों के तहत प्रधानमंत्री मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी वार्ता प्रस्तावित है। साथ ही वे किर्गिज़ राष्ट्रपति सादिर जापारोव के आमंत्रण पर छठे विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में शिरकत करेंगे। मंगलवार को आयोजित होने वाले 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों और सहयोग के विस्तार पर विचार-विमर्श करेंगे, जहां प्रधानमंत्री मोदी कई अन्य द्विपक्षीय बैठकों के जरिए भारत के कूटनीतिक दायरे को मजबूती प्रदान करेंगे।

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