कैबिनेट बैठक: मध्यप्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और ग्रामीण विकास के लिए 41,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव पारित, मूंग खरीदी सीमा बढ़कर 60 फीसदी हुई

भोपाल स्थित मंत्रालय में मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हुई मंत्रि-परिषद की अहम बैठक में प्रदेश के चहुंमुखी विकास को गति देने वाले 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों और वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में ग्रामीण आजीविका विस्तार, सड़क नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण, तकनीकी शिक्षा के विकेंद्रीकरण, पशुपालन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई दूरगामी नीतिगत निर्णय लिए गए।
ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सुरक्षा को नई दिशा देते हुए कैबिनेट ने ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी जी राम जी योजना’ के 1 जुलाई 2026 से अमल के लिए 29,619 करोड़ रुपये के प्रारूप का अनुसमर्थन किया। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण वयस्कों को अब सालाना 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। ग्राम पंचायतों का विकास ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ और जीआईएस तकनीक के आधार पर होगा तथा वित्तीय आवंटन की पारदर्शिता के लिए पंचायतों को क, ख, ग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसके सुचारू क्रियान्वयन हेतु राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद में एक राज्य-स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई गठित होगी।
प्रदेश में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए दो प्रमुख फोर-लेन सड़क परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। पश्चिम भोपाल बायपास (लंबाई 35.61 किमी) के लिए 3,774 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित लागत मंजूर की गई है, जिससे नर्मदापुरम और जबलपुर से इंदौर की ओर जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा। पर्यावरण, टाइगर रिजर्व और पुरातात्विक मंदिर के संरक्षण के मद्देनजर इसके अलाइनमेंट में संशोधन किया गया है। इसी क्रम में, बीना औद्योगिक क्षेत्र को सीधे उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर (एनएच-44) से जोड़ने वाले 67.116 किमी लंबे मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन फोर-लेन मार्ग के निर्माण के लिए 3,272 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
शैक्षणिक सुधारों की दिशा में आरजीपीवी भोपाल का पुनर्गठन कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। प्रशासनिक नियंत्रण और बेहतर प्रबंधन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय साधिकार समिति इन विश्वविद्यालयों की स्थापना का कार्य देखेगी। डेयरी क्षेत्र में 2,973 करोड़ रुपये की लागत से 13 अप्रैल 2025 को निष्पादित अनुबंध के आधार पर एनडीडीबी के सहयोग से ‘सांची’ ब्रांड का कायाकल्प किया जाएगा, जिससे राज्य में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता 17.8 लाख लीटर से बढ़कर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन हो जाएगी।
किसानों के हित में फैसला लेते हुए सरकार ने पंजीकृत कृषकों से ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन की सीमा को 25 फीसदी से बढ़ाकर कुल उपज का 60 फीसदी करने के संशोधन को हरी झंडी दे दी। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में मशीनों के मेंटेनेंस और ओटी-किचन संधारण के लिए वर्ष 2026 से 2031 के लिए 1,404 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत किए गए तथा नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा व निवाड़ी में सामाजिक न्याय व आयुष कार्यालयों के संचालन हेतु कुल 41 नए पदों के सृजन का मार्ग प्रशस्त किया गया।



