मप्र में 1.22 लाख मेधावी छात्रों को मिले लैपटॉप के ₹25-25 हजार, मुख्यमंत्री ने कहा- तकनीक बनेगी उज्ज्वल भविष्य का आधार

भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना’ के अंतर्गत प्रदेश के करीब 1 लाख 22 हजार मेधावी छात्र-छात्राओं को 304.98 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की। माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा में प्रथम प्रयास में 75 फीसदी या उससे अधिक अंक अर्जित करने वाले प्रत्येक लाभार्थी छात्र को 25-25 हजार रुपये प्रदान किए गए।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में मिलने वाली चुनौतियां और संघर्ष ही सफलता की नींव तैयार करते हैं। उन्होंने मूर्तिकार का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह अनावश्यक पत्थरों को हटाकर सुंदर प्रतिमा गढ़ी जाती है, उसी प्रकार शिक्षक और अभिभावक मिलकर विद्यार्थी की अंतर्निहित प्रतिभा को संवारते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने और बड़े लक्ष्यों की ओर दृढ़ संकल्प के साथ बढ़ने की सीख दी। साथ ही सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के मेरिट में बढ़ते प्रदर्शन को व्यवस्थागत बदलाव का सकारात्मक परिणाम बताया।

राज्य की शैक्षिक अधोसंरचना के विस्तार का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार शिक्षा को भविष्य के निवेश के रूप में देखती है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्कूल, उच्च और तकनीकी शिक्षा विभागों के लिए हजारों करोड़ के विशेष वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। चिकित्सा क्षेत्र में सीटों की संख्या साढ़े छह हजार से अधिक हो चुकी है और 2028 तक इसे 10 हजार सीटों तक ले जाने की रूपरेखा तय की गई है। इसके अलावा बोर्ड परीक्षाओं में द्वितीय अवसर प्रणाली लागू होने से विद्यार्थियों को असफलता के दबाव से मुक्ति मिली है।

संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा, तकनीकी दक्षता और समाज सेवा को लेकर अपनी आकांक्षाएं साझा कीं, जिस पर मुख्यमंत्री ने तकनीक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर बल दिया। उन्होंने राज्य के सभी विभागों में जारी सीधी भर्तियों और कर्मचारियों की पदोन्नति का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले सरकारी विद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों को गुरु पूर्णिमा पर सम्मानित किए जाने की परंपरा को भी याद किया।

समारोह में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सरकार की छात्र-हितैषी नीतियों के कारण स्कूलों में ड्रॉप आउट दर पूरी तरह समाप्त हो गई है और अब तक कुल 6.5 लाख विद्यार्थियों को 1620 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने इसे छात्रों के सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बताया। इस दौरान राज्यमंत्री कृष्णा गौर, स्थानीय विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और प्रदेशभर से आए विद्यार्थी व अभिभावक मौजूद रहे।

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