विकसित देशों में भारत से 6 गुना अधिक प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन, आधुनिक समाधान दे रहा है देश: पीएम नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेते हुए कहा कि भारत ने बीते 12 वर्षों में पर्यावरण के प्रत्येक आयाम में अभूतपूर्व सुधार किया है। उन्होंने बताया कि इस विकास यात्रा में अक्षय ऊर्जा को केंद्र में रखा गया, जिसने पर्यावरण संवर्धन में अत्यंत निर्णायक भूमिका अदा की है। देश अपनी प्राचीन विरासत और समकालीन सोच के समन्वय के साथ सतत विकास की दिशा में अग्रसर है।
संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि सदियों से पर्यावरण संरक्षण के मामले में भारत की भूमिका वैश्विक पथ-प्रदर्शक की रही है। इन्हीं सांस्कृतिक मूल्यों से प्रेरणा लेकर देश मौजूदा जलवायु संकटों से निपटने के व्यावहारिक उपाय दुनिया के सामने रख रहा है, साथ ही वैश्विक स्तर पर सम्मिलित प्रयासों को गति देने का आह्वान कर रहा है। उन्होंने NGT द्वारा इस सम्मेलन के माध्यम से इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के प्रयास की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन उत्सर्जन का दायित्व प्रायः अनुचित ढंग से विकासशील देशों के सिर मढ़ दिया जाता है। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक आधार पर देखा जाए तो आज भी भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत के 50 प्रतिशत से भी नीचे बना हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन की दर भारत की तुलना में छह गुना तक ज्यादा है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत इस सच्चाई को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बिना किसी संकोच के निरंतर और प्रभावी ढंग से उठाता रहा है।



