एफटीए साझेदार देशों को भारतीय निर्यात में बड़ा उछाल, पहली तिमाही के व्यापार आंकड़ों में दिखी मजबूती

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले तीन महीनों में भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का सकारात्मक प्रभाव राष्ट्रीय व्यापार पर स्पष्ट रूप से दिखा है, जहां एफटीए साझेदार देशों को किए जाने वाले निर्यात में तेज बढ़त दर्ज की गई। तंजानियाई अखबार ‘द गार्जियन’ के एक लेख में दिए गए विवरण के मुताबिक, बातचीत के माध्यम से विदेशी बाजारों में मिली छूट का फायदा उठाते हुए भारत ने आसियान देशों को निर्यात में 60 फीसदी से ज्यादा और सिंगापुर व श्रीलंका को निर्यात में दोगुने से अधिक की वृद्धि हासिल की है।
विश्लेषण में रेखांकित किया गया है कि देश के व्यापारिक समझौतों का दायरा बढ़ने से भारतीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजारों में सशक्त हुई है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 863.1 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर का समग्र निर्यात किया था, जिसमें 441.8 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार तथा 421.3 अरब डॉलर का सेवा क्षेत्र शामिल था। वर्तमान आंकड़े दर्शाते हैं कि देश अपनी निर्यात नीति के तहत तरजीही व्यवस्थाओं का रणनीतिक लाभ उठा रहा है।
वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में सिंगापुर को भारतीय निर्यात 101.2 फीसदी बढ़कर 6.52 अरब डॉलर दर्ज हुआ, जो गत वर्ष की समान तिमाही में 3.24 अरब डॉलर था। श्रीलंका के मामले में यह उछाल 123.8 फीसदी रहा, जिससे व्यापार मूल्य 1.05 अरब डॉलर से बढ़कर 2.35 अरब डॉलर हो गया। पूरे आसियान क्षेत्र की बात करें तो भारत का निर्यात 9.04 अरब डॉलर से 61.6 फीसदी की छलांग लगाकर 14.61 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
इस दौरान अन्य सहयोगी देशों के साथ भी व्यापारिक संबंधों में गतिशीलता देखी गई। मलेशिया के साथ निर्यात 75.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2.54 अरब डॉलर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया के लिए यह 25.2 प्रतिशत बढ़कर 2.68 अरब डॉलर हुआ। दक्षिण कोरिया को 1.95 अरब डॉलर (22.6 प्रतिशत अधिक), जापान को 1.75 अरब डॉलर (22.4 प्रतिशत अधिक), ओमान को 1.39 अरब डॉलर (26.4 प्रतिशत अधिक) तथा नेपाल को 2.28 अरब डॉलर (18.1 प्रतिशत अधिक) का निर्यात किया गया। भूटान को निर्यात में 16.1 फीसदी और थाईलैंड में 6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
भारत सरकार द्वारा हाल के समय में हस्ताक्षरित प्रमुख समझौतों में यूएई (सीईपीए), ऑस्ट्रेलिया (ईसीटीए), ईएफटीए (टीईपीए), ओमान (सीईपीए) और यूनाइटेड किंगडम (सीईटीए) शामिल हैं। न्यूजीलैंड के साथ तय हुआ एफटीए वर्तमान में लागू होने की प्रक्रिया से गुजर रहा है, जबकि यूरोपीय संघ के साथ व्यापारिक बातचीत जनवरी 2026 में पूरी की जा चुकी है।



