प्रशासनिक कार्यों में तेजी: गृह मंत्रालय ने 10 महीनों में निपटाईं 59 हजार से अधिक जन शिकायतें और अपीलें

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच लंबित मामलों के निस्तारण में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए 59 हजार से अधिक जन शिकायतों और अपीलों का समाधान किया है। एक आधिकारिक बयान के माध्यम से यह जानकारी साझा की गई है, जो सरकारी दफ्तरों में कार्य संस्कृति को सुधारने और लंबित फाइलों की संख्या न्यूनतम करने की दिशा में जारी प्रयासों का हिस्सा है।
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस 10 महीने की समयावधि में कुल 52,050 आम शिकायतों का निपटारा किया गया, जबकि 7,410 अपीलों का समाधान निकाला गया। इसके अतिरिक्त, जनप्रतिनिधियों और अन्य संस्थानों से प्राप्त पत्राचार पर भी त्वरित कार्रवाई की गई; जिनमें संसद सदस्यों के 299 संदर्भ, राज्य सरकारों की ओर से आए 336 संदर्भ और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जुड़े सात मामले शामिल हैं।
यह ब्योरा ऐसे समय सामने आया है जब गृह मंत्रालय प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) के आगामी ‘विशेष अभियान-छह’ में हिस्सा लेने की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इस राष्ट्रव्यापी पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी प्रतिष्ठानों में लंबित कार्यों को समाप्त करना, अभिलेखों (रिकॉर्ड्स) के व्यवस्थित प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना और कार्यस्थलों पर स्वच्छता को बढ़ावा देना है। तय कार्यक्रम के अनुसार, इस अभियान का तैयारी चरण 15 से 30 सितंबर तक संचालित होगा, जिसके बाद 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक इसका सघन क्रियान्वयन किया जाएगा।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देशों के तहत आम नागरिकों के सीधे संपर्क में आने वाले क्षेत्रीय व दूरदराज के कार्यालयों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ‘विशेष अभियान-छह’ का लक्ष्य एक दीर्घकालिक और पर्यावरण के अनुकूल कार्यस्थल का निर्माण करना तथा विभिन्न श्रेणियों में अटके हुए मामलों को समाप्त करना है।
बयान के मुताबिक, बीते 10 महीनों के दौरान मंत्रालय और उसके अधीनस्थ संस्थानों द्वारा 761 स्वच्छता अभियान चलाए गए। इस व्यापक सफाई और पुनर्गठन के फलस्वरूप मंत्रालय के दफ्तरों एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के परिसरों में लगभग 1,02,084 वर्ग फुट स्थान खाली कराया गया। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सीएपीएफ तथा केंद्रीय पुलिस संगठनों (सीपीओ) को तय लक्ष्यों को पार करने के लिए प्रेरित किया गया है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी एक आंतरिक पोर्टल के जरिए की जा रही है, जहां मंत्रालय के सभी प्रभाग, केंद्र शासित प्रदेश और दिल्ली पुलिस अपनी प्रगति से जुड़े आंकड़े साझा कर रहे हैं।


