शेयर बाजार में लौटी रौनक: वैश्विक संकेतों के सहारे निचले स्तरों से उबरा बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त पर बंद

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिवस शुक्रवार को भारतीय इक्विटी बाजार पिछले दिन के बड़े नुकसान से उबरते हुए मजबूती के साथ बंद हुआ। इस कारोबारी सत्र में बाजार के मुख्य मानक सूचकांकों—सेंसेक्स और निफ्टी—में 0.43 फीसदी तक की रिकवरी देखने को मिली।

पश्चिम एशिया के लगातार तनावपूर्ण घटनाक्रमों के बीच अमेरिका-ईरान युद्धविराम की बनी संभावनाओं से कच्चे तेल के भाव में गिरावट आई, जिसने बाजार के सेंटिमेंट को सहारा दिया और दोनों बेंचमार्क दिन के ऊपरी स्तरों पर टिकने में कामयाब रहे। सत्र के अंत में सेंसेक्स 315.20 अंक (0.43 प्रतिशत) की बढ़त लेकर 73,895.74 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 77.40 अंक (0.34 प्रतिशत) चढ़कर 23,140.50 के स्तर पर पहुंच गया।

कारोबार की शुरुआत हल्की कमजोरी के साथ हुई थी। सेंसेक्स पिछले बंद 73,580.54 के मुकाबले 54.61 अंक की गिरावट के साथ 73,525.92 पर खुला, लेकिन लिवाली के दम पर इसने दिन के दौरान 387.51 अंक (0.52 प्रतिशत) की छलांग लगाते हुए 73,968.05 का उच्च स्तर हासिल किया। दूसरी ओर, निफ्टी अपने पिछले बंद स्तर 73,968.05 से 28 अंक (0.12 प्रतिशत) गिरकर 23,035 पर खुला और इंट्रा-डे सत्र में 99.60 अंक (0.43 प्रतिशत) चढ़कर 23,162.70 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा।

ब्रॉडर मार्केट में प्रदर्शन एक समान नहीं रहा; जहां निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.14 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.15 प्रतिशत की बढ़त हासिल करने में सफल रहा। सेक्टोरल मोर्चे पर सबसे बेहतर प्रदर्शन निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो का रहा, जबकि निफ्टी सीमेंट, निफ्टी मीडिया, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा के क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

कंपनियों के शेयरों में एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, पावरग्रिड, टाइटन और इंडिगो प्रमुख बढ़त हासिल करने वाले स्टॉक रहे। इसके विपरीत मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, इंफोसिस, ओएनजीसी और ट्रेंट के शेयरों में सर्वाधिक गिरावट देखी गई।

पूर्ववर्ती सत्रों की गिरावट के उपरांत चुनिंदा शेयरों में हुई लिवाली ने बाजार को सहारा अवश्य दिया, लेकिन बढ़त एक दायरे में ही सिमटी रही। क्रूड ऑयल में जारी अस्थिरता और बॉन्ड यील्ड के उच्च स्तरों पर रहने से तेजी की रफ्तार थमी रही। इसके अतिरिक्त, महंगाई से जुड़े जोखिम, विदेशी फंड्स की निकासी और इमर्जिंग मार्केट की मुद्राओं पर जारी दबाव से बाजार की कुल बढ़त सीमित बनी रही।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button