‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने गिनाईं जनभागीदारी की मिसालें: कुपोषण मुक्ति, डिजिटल जनगणना और नशामुक्त भारत पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 138वीं कड़ी में देश को संबोधित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे जन-आंदोलनों की प्रगति की समीक्षा की। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से जनगणना में सक्रिय भागीदारी की अपील की और कुपोषण से निपटने, युवाओं को नशे से दूर रखने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने तथा भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार जैसे विषयों पर प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किए।
जनगणना को राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से इसमें स्वेच्छा से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोग ‘se.census.gov.in’ पोर्टल के माध्यम से मोबाइल फोन से लगभग 15 से 20 मिनट में बिना किसी दस्तावेज को अपलोड किए स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह सुविधा हिंदी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध है, जिसके बाद मिलने वाली विशेष आईडी को गणनाकर्मी के आने पर साझा करना होता है। अब तक 2 करोड़ 60 लाख से अधिक नागरिक स्व-गणना कर चुके हैं, जबकि देश भर में पहले चरण के तहत 32 करोड़ से ज्यादा परिवारों का विवरण दर्ज हो चुका है। दुर्गम क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देश के पहले गांव माने जाने वाले उत्तराखंड के माणा (चमोली) में 83 वर्षीय पूर्णिमा रावत और उत्तरकाशी के बगोरी में होमस्टे संचालक हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल माध्यम से अपनी प्रविष्टियां दर्ज कराई हैं।
सितंबर माह को कुपोषण उन्मूलन के लिए समर्पित बताते हुए प्रधानमंत्री ने राज्यों की जमीनी कोशिशों को रेखांकित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की चर्चा करते हुए मोरिंगा को पोषण का उत्कृष्ट स्रोत बताया। वहीं, गुजरात में मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित ‘वांगी स्पर्धा’ का उल्लेख किया, जिसमें दो लाख से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। इसके अलावा महाराष्ट्र में स्कूल-समुदाय के तालमेल और मिजोरम में ‘तलो-मड़-यना’ (निस्वार्थ सेवा) परंपरा के तहत पोषित की जा रही पोषण वाटिकाओं की उन्होंने सराहना की। प्रधानमंत्री ने बताया कि तकनीकी मोर्चे पर ‘पोषण ट्रैकर’ से डिजिटल रूप से जुड़ीं आंगनवाड़ियों में करीब 9 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत हैं, जिससे बच्चों व धात्री माताओं की बेहतर निगरानी संभव हो सकी है।
स्थानीय आजीविका और आत्मनिर्भरता के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में आंवले के योगदान को सामने रखा। ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत वहां संचालित करीब 100 प्रसंस्करण इकाइयों में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की भूमिका अहम रही है। उन्होंने देवगढ़ कमासिन गांव के सावित्री फुले स्वयं सहायता समूह का उदाहरण देते हुए बताया कि आधुनिक मशीनरी, ऋण और मेलों के माध्यम से बाजार मिलने से महिलाएं कैंडी, मुरब्बा, जूस और पाचक पाउडर बनाकर आत्मनिर्भर हो रही हैं। पीएम ने जोर दिया कि स्थानीय विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाकर ही ‘वोकल फॉर लोकल’ को वास्तविक शक्ति दी जा सकती है।
युवा शक्ति और सामाजिक सुरक्षा के विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने 100 सप्ताह तक चलने वाले ‘नशामुक्त युवा अभियान’ का ब्योरा दिया। इसमें ‘माय भारत’ के स्वयंसेवकों, एनएसएस और शिक्षण संस्थानों के छात्रों की भागीदारी के साथ-साथ जागरूकता रैलियां, स्लोगन, नुक्कड़ नाटक और सोशल मीडिया गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने आगामी त्योहारों के दौरान परिजनों व समाज से युवाओं पर स्नेहपूर्ण नजर रखने और व्यसन की ओर बढ़ रहे लोगों को संभालने का आग्रह किया। अंत में, थाईलैंड में भारतीय संस्कृति की स्वीकार्यता का जिक्र करते हुए उन्होंने चियांग माई निवासी पंथौन थीरखानोन की सराहना की, जिन्होंने चार दशकों के अध्ययन के बाद वहां 10 हजार से अधिक प्रतिमाओं वाला ‘गणेश हिमाल म्यूजियम’ स्थापित किया और थाईलैंड में अष्टविनायक यात्रा को लोकप्रिय बनाया।



