वैश्विक तनाव, कच्चे तेल के उछाल और विदेशी पूंजी निकासी से शेयर बाजार में भारी गिरावट; सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा

घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सोमवार को भारी नुकसान दर्ज करते हुए बंद हुए। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट, कच्चे तेल में तेजी, अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड प्रतिफल में उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते बाजार में यह तेज गिरावट आई।
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1,124.02 अंक अथवा 1.52 प्रतिशत लुढ़ककर 72,771.72 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 सूचकांक भी 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत के नुकसान के साथ 22,780.25 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में चौतरफा दबाव देखा गया, जिससे लार्ज-कैप के साथ-साथ मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी तीव्र बिकवाली दर्ज की गई।
एनएसई निफ्टी पर सूचीबद्ध प्रमुख कंपनियों में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV), पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा। व्यापक बाजार के रुझान भी बेहद कमजोर रहे। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक में 1.63 प्रतिशत की नरमी आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 1.85 प्रतिशत के नुकसान पर रहा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात ने बाजार के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया। निवेशकों को अंदेशा है कि यदि यह तनाव आगे बढ़ा तो दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव और बढ़ जाएगा। इसी आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उबाल देखा गया; ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 106.6 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.45 प्रतिशत चढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। चूंकि भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के ऊंचे दाम घरेलू अर्थव्यवस्था व मुद्रास्फीति के लिए बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं।
इसके अलावा, दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया। महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बीच बॉन्ड बाजार में बिकवाली बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील दो-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट्स की यील्ड पांच आधार अंक बढ़कर 4.90 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, 10-वर्षीय बेंचमार्क ट्रेजरी यील्ड चार आधार अंक चढ़कर 5.20 प्रतिशत पर पहुंच गई। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड पर मिलने वाला अधिक रिटर्न भारतीय इक्विटी जैसी जोखिम वाली उभरती बाजार परिसंपत्तियों के आकर्षण को घटाता है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की अनवरत निकासी ने घरेलू बाजार के दबाव को और गंभीर बना दिया। जुलाई और अगस्त में भारतीय बाजार में लिवाल रहने वाले विदेशी निवेशक सितंबर महीने में शुद्ध रूप से बिकवाल बन चुके हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने मौजूदा महीने में अब तक 17,131 करोड़ रुपये मूल्य के भारतीय शेयर बेचे हैं। इस ताजा निकासी के साथ ही इस वर्ष उनकी कुल शुद्ध बिकवाली का आंकड़ा बढ़कर 2.41 लाख करोड़ रुपये हो गया है।



