वैश्विक अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव से फिसला बाजार; सेंसेक्स व निफ्टी में लगातार दूसरे सत्र गिरावट

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड प्रतिफल में जारी अस्थिरता के चलते मंगलवार को भारतीय इक्विटी बाजारों में लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दौर जारी रहा। निवेशकों द्वारा जोखिम से दूरी बनाए रखने के कारण प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 242.65 अंक अथवा 0.33 प्रतिशत टूटकर 72,529.07 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 64.05 अंक यानी 0.28 फीसदी घटकर 22,716.20 के स्तर पर आ गया।
कारोबार के दौरान लार्ज-कैप श्रेणी के प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी के घटकों में टाइटन कंपनी सबसे अधिक नुकसान उठाने वाला शेयर साबित हुआ। इसके अलावा, आईटी क्षेत्र के दिग्गज शेयरों विप्रो और एचसीएल टेक में आई कमजोरी ने भी सूचकांकों को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई।
मुख्य सूचकांकों की तरह ही व्यापक बाजार में भी निवेशकों ने सतर्कता बरतते हुए अपनी हिस्सेदारी घटाई। इसका सीधा असर मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा, जिससे निफ्टी मिडकैप सूचकांक 0.99 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक 0.81 प्रतिशत लुढ़ककर बंद हुए।
विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की बात करें तो कच्चे तेल की ऊंची दरों के चलते इनपुट लागत बढ़ने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर उपजी चिंताओं ने बाजार का मिजाज बिगाड़ दिया। परिणामस्वरूप निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी केमिकल, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी आईटी सत्र के सबसे कमजोर इंडेक्स साबित हुए।
इस चौतरफा सुस्ती के माहौल में केवल फार्मा शेयरों ने ही बाजार को कुछ संबल प्रदान किया। व्यापक बाजार में गिरावट के बावजूद निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने सकारात्मक प्रदर्शन किया और दिन के बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टोरल सूचकांकों की सूची में अपनी जगह बनाई।
वर्तमान में ऊर्जा बाजार में तेजी और बॉन्ड यील्ड के उतार-चढ़ाव से पैदा हुई अनिश्चितता के चलते निवेशक अत्यंत सतर्क रुख अपना रहे हैं और सीमित सेक्टरों पर ही भरोसा कर रहे हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव में कमी आती है, तो बाजार में तेजी से वापसी की संभावना बन सकती है। फिलहाल निवेशक पूरे बाजार में आक्रामक खरीदारी करने के बजाय मजबूत बुनियादी आधार और स्पष्ट आय क्षमता वाली कंपनियों तक ही अपना ध्यान सीमित रख रहे हैं।



