ग्रामीण सड़कों के प्रभाव का अध्ययन करेगा आईआईएम कलकत्ता, एनआरआईडीए के साथ हुआ समझौता

राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (एनआरआईडीए) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) कलकत्ता ने ग्रामीण सड़कों के सामाजिक-आर्थिक व विकासात्मक प्रभावों के दीर्घकालिक आकलन के लिए एक चार वर्षीय अध्ययन को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन योजनाओं के अंतर्गत निर्मित सड़कों से ग्रामीण जनजीवन में आ रहे बदलावों का साक्ष्य-आधारित विश्लेषण किया जाएगा।

इस द्विपक्षीय समझौते पर ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से एनआरआईडीए की महानिदेशक अदिति सिंह और आईआईएम कलकत्ता के निदेशक प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने दस्तखत किए। इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल सहित मंत्रालय और संस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह पहल ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं के धरातलीय परिणामों के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई है।

चार साल तक चलने वाले इस शोध कार्य का दायरा 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तृत रहेगा। इसके अंतर्गत आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम और उत्तराखंड के 50 जिलों, 150 ब्लॉकों और 250 ग्रामीण मार्गों को शामिल किया जाएगा। ग्रामीण सड़क संपर्कता के जमीनी असर को गहराई से समझने के लिए इस दौरान लगभग 5,000 परिवारों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा।

परियोजना के दौरान समय के साथ होने वाले क्रमिक परिवर्तनों को मापने के लिए लॉन्गिट्यूडिनल पद्धति का उपयोग होगा। डेटा संकलन दो मुख्य चरणों—सड़क निर्माण से पूर्व बेसलाइन सर्वे और निर्माण के बाद एंडलाइन सर्वे—के माध्यम से संपन्न होगा। तय कार्ययोजना के मुताबिक, बेसलाइन सर्वेक्षण के लिए 14 महीने, परिवर्तन दर्ज करने वाली अंतरिम अवधि के लिए लगभग 12 महीने और अंतिम एंडलाइन सर्वेक्षण के लिए 22 महीने की समयसीमा निर्धारित की गई है।

इस अध्ययन में ग्रामीणों के आवागमन की सुगमता, यात्रा समय व परिवहन व्यय में बचत के साथ-साथ आजीविका, रोजगार और आय के विभिन्न स्रोतों पर पड़ने वाले प्रभावों का परीक्षण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कृषि, गैर-कृषि गतिविधियों, मंडियों तक पहुंच, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और बुनियादी वित्तीय व सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता पर सड़क संपर्क के असर को परखा जाएगा। साथ ही, परिवारों के जीवन स्तर में सुधार, सुविधाओं के अभाव और रोजगार हेतु पलायन पर निर्भरता में आए बदलावों का भी विश्लेषण होगा।

शोध का एक प्रमुख पहलू विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और समाज के कमजोर वर्गों पर इन योजनाओं के प्रभावों का तुलनात्मक विश्लेषण करना तथा इन लाभों के स्थायित्व की जांच करना है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क निर्माण के फायदे लंबे समय तक कितने प्रभावी रहते हैं। एनआरआईडीए और आईआईएम कलकत्ता का यह साझा प्रयास योजनाओं के क्रियान्वयन की कमियों व उभरती चुनौतियों को चिन्हित करने के साथ ही भविष्य की ग्रामीण अवसंरचना परियोजनाओं के नियोजन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में उपयोगी साबित होगा।

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