केंद्रीय मंत्री स्वच्छता को तय समय-सीमा तक सीमित न रखकर दैनिक आचरण में शामिल करें: शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दोनों मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित एक वर्चुअल समीक्षा बैठक में स्वच्छता को केवल समयबद्ध कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय आम जनजीवन और आचरण का स्थायी हिस्सा बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन प्रयासों में जनभागीदारी बढ़ाई जाए और किए जा रहे कार्यों के ठोस व स्पष्ट परिणाम जमीनी स्तर पर दिखने चाहिए।
समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभागीय कार्मिकों से स्वयं पहल करते हुए कार्यस्थलों, क्षेत्रीय कार्यालयों और ग्रामीण अंचलों में निरंतर अलख जगाने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ तभी सार्थक और दीर्घकालिक सिद्ध हो सकता है, जब पंचायत स्तर तक कृषकों, स्थानीय नागरिकों, स्वच्छता कर्मियों तथा संचार माध्यमों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित हो। इसके साथ ही उन्होंने कार्यों के वास्तविक असर को परखने के लिए व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और ‘पहले व बाद’ के चित्रों के जरिए उपलब्धियों का संकलन करने के निर्देश दिए।
बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्रा, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव व आईसीएआर के महानिदेशक मांगी लाल जाट, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल तथा भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव पी. नरहरि ने अपने-अपने विभागों की वर्तमान गतिविधियों और भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की। कृषि विभाग ने बताया कि 16 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता शपथ, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ पाठशाला, दफ्तरों व शौचालयों की सघन सफाई, स्वास्थ्य परीक्षण और सफाई मित्रों के सम्मान जैसे अनेक कार्यक्रम चलाए गए हैं।
मंत्रालयों में बेकार पड़े सामान और ई-कचरे के निपटान तथा नीलामी से लगभग 15 लाख रुपये का राजस्व जुटाया गया है, जबकि कार्मिकों ने श्रमदान कर परिसरों को स्वच्छ बनाया। बैठक में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ मुहिम को गति देने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तावित विशेष अभियान का खाका रखा गया, जिसमें पुराने प्रकरणों के निस्तारण, कबाड़ व अप्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को हटाने और दफ्तरों में जगह के बेहतर उपयोग के लक्ष्य तय किए गए हैं, जिनकी नियमित समीक्षा की जाएगी।
पूसा परिसर सहित देशभर के सभी आईसीएआर संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) में भी सघन अभियान जारी है, जहां वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सीधी भागीदारी है। केवीके के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों और अन्नदाताओं को कचरा प्रबंधन व पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अंत में केंद्रीय मंत्री ने पुनः रेखांकित किया कि अभियान की वास्तविक उपलब्धि परिसरों की सामयिक सफाई मात्र नहीं, बल्कि लोगों की आदतों में स्थायी बदलाव और जमीनी सुधार से ही संभव होगी।



