एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी का ऐतिहासिक पराक्रम: चीन को 1-0 से मात देकर 44 वर्ष बाद स्वर्ण पर कब्जा

भारतीय महिला हॉकी टीम ने शुक्रवार को एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में चीन के खिलाफ 1-0 से रोमांचक जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक हासिल किया। वर्ष 1982 के बाद यानी 44 वर्षों के सूखे को समाप्त करते हुए भारतीय दल ने इस खिताबी जीत के साथ लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में अपनी जगह भी सुनिश्चित कर ली।
फाइनल मैच के पहले क्वार्टर में भारतीय टीम ने आक्रामक शुरुआत की। छठे मिनट में बलजीत कौर को मिले ग्रीन कार्ड के बावजूद टीम का ध्यान नहीं भटका। अपने 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच में उतरीं लालरेम्सियामी ने 10वें मिनट में बेहतरीन गोल कर भारत को शुरुआती बढ़त दिला दी। भारतीय टीम को इसके बाद मिला पेनल्टी कॉर्नर भले ही गोल में तब्दील नहीं हो सका, लेकिन शुरुआती क्वार्टर समाप्त होने तक बढ़त बरकरार रही।
दूसरे क्वार्टर के दौरान चीनी खिलाड़ियों ने भारतीय रक्षापंक्ति को कड़ी चुनौती दी और उन्हें बराबरी करने के लिए पेनल्टी स्ट्रोक मिला। इस दबाव भरे क्षण में गोलकीपर सविता पूनिया ने बेहतरीन सूझबूझ का प्रदर्शन करते हुए पेनल्टी स्ट्रोक रोक दिया और चीन को गोल करने से वंचित रखा। तीसरे क्वार्टर में कप्तान सलीमा टेटे के चोटिल होने के बाद भी भारतीय डिफेंस पूरी मजबूती से डटा रहा।
चौथे क्वार्टर में कप्तान सलीमा टेटे ने मैदान पर वापसी कर टीम की कमान संभाली। आखिरी मिनटों में चीनी टीम ने गोल करने का पूरा प्रयास किया, मगर भारतीय खिलाड़ियों ने अनुशासित खेल दिखाते हुए 1-0 के स्कोर पर मुकाबला समाप्त कर दिया। भारतीय महिला टीम ने इससे पहले 1982 में स्वर्ण जीता था, जबकि 1998 में रजत और 2018 के एशियन गेम्स में भी टीम उपविजेता रही थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टीम के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए इस क्षण को भारतीय हॉकी के इतिहास का एक विशेष पड़ाव बताया। उन्होंने खिलाड़ियों के तालमेल, जज्बे और दक्षता को रेखांकित करते हुए आशा जताई कि यह सफलता देश में हॉकी को नई दिशा देगी।
केंद्रीय नेतृत्व ने भी टीम के प्रदर्शन को सराहा। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इसे 1982 के बाद का सबसे बड़ा गौरवशाली क्षण बताते हुए ओलंपिक 2028 के सीधे प्रवेश पर प्रसन्नता जताई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे दृढ़ संकल्प और टीमवर्क की जीत करार दिया, जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लालरेम्सियामी के गोल व सविता पूनिया के ऐतिहासिक बचाव को रेखांकित करते हुए कहा कि यह खेल आने वाले समय में देश के युवाओं को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।



