रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का बड़ा पड़ाव: एचएएल ने डिलीवर किया 2000वां एयरो-इंजन, शक्ति इंजन की नई उत्पादन लाइन शुरू

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के कोरापुट प्रभाग द्वारा निर्मित 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में संपन्न हुई। इस अवसर पर स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की शक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से कोरापुट में शक्ति इंजन की दूसरी निर्माण लाइन का भी औपचारिक उद्घाटन किया गया।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 2,000वें इंजन की डिलीवरी भारतीय एयरोस्पेस क्षेत्र और सैन्य बलों की सामरिक क्षमताओं में दिया गया एक ठोस योगदान है। उन्होंने इस दीर्घकालिक उपलब्धि का श्रेय वर्षों से कार्यरत इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों की निष्ठा को दिया। वर्ष 1964 में स्थापित एचएएल कोरापुट केंद्र ने मिग-21 से लेकर मिग-27, मिग-29 और आधुनिक सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों के इंजनों के निर्माण और रखरखाव में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
संयंत्र में 218 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार की गई शक्ति इंजन की दूसरी लाइन से देश में उत्पादन की अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। यह नई क्षमता उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर की बढ़ती सैन्य मांग को पूरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक थी। रक्षा मंत्री के अनुसार, उपकरणों के स्थानीयकरण और निर्माण समय में कटौती से हमारी सेनाओं की त्वरित परिचालन तैयारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।
राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भविष्य के वृहद विजन से जोड़ते हुए कहा कि आज का यह पड़ाव केवल उत्सव मनाने का विषय नहीं, बल्कि अगले 10 हजार और एक लाख इंजनों के निर्माण के संकल्प की शुरुआत है। उन्होंने एक ऐसे सक्षम भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के विकास पर जोर दिया जो विश्वस्तरीय प्रणोदन प्रौद्योगिकियों को डिजाइन करने से लेकर उनके पूर्ण समर्थन तक में आत्मनिर्भर हो। उन्होंने याद दिलाया कि एयरो-इंजन तकनीक में दक्षता हासिल करना जटिल औद्योगिक महारत का प्रमाण है, जिसे हासिल करने वाले गिने-चुने देशों में भारत अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है।
आत्मनिर्भरता के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इंजन निर्माण की पूर्ण सफलता कच्चे माल की आपूर्ति पर निर्भर करती है। मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानी) के साथ मिलकर कच्चे माल के स्वदेशीकरण पर किया जा रहा कार्य इस दिशा में बुनियादी कदम है, जिससे बाहरी निर्भरता न्यूनतम की जा सकेगी।
सुखोई-30 एमकेआई के एएल-31एफपी इंजनों के संदर्भ में उन्होंने विवरण दिया कि 2024 में भारत सरकार द्वारा दिए गए 240 इंजनों के अनुबंध में वैश्विक व्यवधानों के बावजूद पहला इंजन समय से पहले सौंपा गया था। इसके साथ ही, दूसरे वर्ष के 60 इंजनों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 63 इंजन सौंपे जा चुके हैं। इस आपूर्ति को और तेज करने के लिए 335 करोड़ रुपये की लागत से वार्षिक उत्पादन क्षमता को 30 से बढ़ाकर 50 इंजन किया जा रहा है, जो स्वदेशी रक्षा आपूर्ति को गति देने की सरकारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है।



