वित्तीय स्थिरता परिषद की बैठक में साइबर सुरक्षा और वैश्विक जोखिमों पर मंथन, लावारिस वित्तीय संपत्तियों की वापसी में तेजी लाने के निर्देश

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (एफएसडीसी) की 30वीं बैठक का नेतृत्व किया। परिषद के सदस्यों की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक का मुख्य एजेंडा भारत की व्यापक वित्तीय स्थिरता, उभरती आर्थिक चुनौतियां और भविष्य की सुरक्षात्मक तैयारियों की समीक्षा करना था।

समीक्षा के दौरान वित्तीय क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के समावेश और विनियामक सुधारों पर गहन विमर्श हुआ। परिषद ने फिनटेक सेक्टर में नवाचार को गति देने के उपायों पर मंथन किया। इसके साथ ही विभिन्न वित्तीय तथा वास्तविक परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन की व्यावहारिक संभावनाओं को तलाशने पर भी सहमति बनी, ताकि आधुनिक वित्तीय सेवाओं को नई दिशा दी जा सके।

देश के बैंकिंग और वित्तीय नेटवर्क को सुरक्षित रखने के क्रम में साइबर सुरक्षा क्षमताओं का विस्तृत जायजा लिया गया। वित्तीय नियामकों और सुरक्षा एजेंसियों के अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा डीईए, डीएफएस और एमईआईटीवाई के संयुक्त समन्वय से तैयार ‘वित्तीय क्षेत्र पर साइबर सुरक्षा रणनीति’ (एफएससीएसएस) पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस रणनीति के प्रभावी क्रियान्वयन से वित्तीय बुनियादी ढांचे, महत्वपूर्ण सूचना तंत्र और विशेष रूप से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक पुख्ता होगी।

वैश्विक मोर्चे पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल, अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तीव्र उपयोग से उत्पन्न जोखिमों को ध्यान में रखते हुए परिषद ने अत्यधिक सतर्क रहने का आह्वान किया। सदस्यों ने माना कि वित्तीय व्यवस्था की सुरक्षा के लिए नियामकों के बीच आपसी समन्वय को बढ़ाना और समय रहते एहतियाती कदम उठाना अनिवार्य है, जिससे किसी भी संभावित आर्थिक झटके से घरेलू बाजार को सुरक्षित रखा जा सके।

बैठक के अंतिम चरण में आम जनता की लावारिस पड़ी वित्तीय संपत्तियों—जैसे अप्रयुक्त बैंक खाते, लाभांश, शेयर, डाकघर जमा, बीमा और पेंशन फंड—को उनके सही दावेदारों को लौटाने की प्रक्रिया को तेज करने का स्पष्ट आह्वान किया गया। परिषद ने जिला स्तर पर चलाए गए ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ अभियान की प्रगति को संतोषजनक बताते हुए संबंधित विभागों को तय समय सीमा के भीतर धन वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के मद्देनजर वित्त मंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि एफएसडीसी की आगामी समीक्षा बैठकें बिना किसी विलंब के निर्धारित समय पर आयोजित होती रहें।

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