81वें संयुक्त राष्ट्र दिवस पर विदेश मंत्री की दो टूक: वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का पुनर्गठन जरूरी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को 81वें संयुक्त राष्ट्र दिवस के मौके पर कहा कि मौजूदा दौर की चुनौतियों और जमीनी हकीकत को दर्शाने के लिए बहुपक्षीय ढांचे में बुनियादी सुधार अपरिहार्य हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के बुनियादी चार्टर के प्रति भारत के निरंतर समर्थन की पुष्टि भी की।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने वक्तव्य में विदेश मंत्री ने विश्व में अमन-चैन बनाए रखने, साझा सहयोग बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आवाज बनने के प्रति भारत का रुख साफ किया। उन्होंने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र तभी सार्थक और समावेशी बना रह सकता है, जब वह वैश्विक भू-राजनीति में आ रहे बदलावों को स्वीकार करे और स्वयं को समकालीन परिस्थितियों के अनुसार ढाले।
विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि 81वें स्थापना दिवस पर भारत चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए ऐसे सुधारों की वकालत करता है जो समकालीन दुनिया की असल तस्वीर पेश करें। उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र में भारत सदैव वैश्विक सुरक्षा, साझे सहयोग और विकासशील समाज के अधिकारों के पक्ष में खड़ा रहेगा।
विदेश मंत्री की यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में सुधार को लेकर भारत के पुराने और निरंतर रुख को दर्शाती है। भारत निरंतर यह कहता आ रहा है कि वैश्विक संस्थाओं को वर्तमान आर्थिक और राजनीतिक बदलावों के साथ कदमताल करनी चाहिए। खास तौर पर सुरक्षा परिषद में विस्तार और बदलाव की मांग करते हुए भारत का तर्क रहा है कि वैश्विक निर्णयों में विकासशील देशों और उभरती हुई ताकतों को यथोचित प्रतिनिधित्व मिलना अनिवार्य है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा कार्यालय ने दिवस विशेष पर चार्टर की प्रस्तावना का मूल ड्राफ्ट साझा किया, जिसमें उस दौर के हाथ से लिखे गए नोट्स शामिल हैं। यह दस्तावेज उस ऐतिहासिक प्रक्रिया का प्रमाण है जिसके जरिए इस महत्वपूर्ण वैश्विक चार्टर को अंतिम रूप दिया गया था।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य की बात करें तो 81 साल पहले सैन फ्रांसिस्को में 50 देशों ने शांति, विकास और मानवाधिकारों की रक्षा के साझा उद्देश्य से इस मंच की नींव रखी थी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वे मूलभूत मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। 24 अक्टूबर 1945 को संस्थापक सदस्यों और प्रमुख शक्तियों के अनुमोदन के साथ यह चार्टर प्रभाव में आया था, जिसकी स्मृति में यह दिन प्रतिवर्ष आयोजित होता है। 81वें स्थापना वर्ष में भी वैश्विक सहयोग को गहरा करने और व्यवस्थागत सुधारों को लागू करने की आवश्यकता अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में बनी हुई है।



