वैश्विक संकट के समय संयुक्त राष्ट्र मूकदर्शक बनने के बजाय आगे बढ़कर नेतृत्व करे: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

नई दिल्ली में रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक संकटों के दौर में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्था को केवल तमाशबीन बने रहने के बजाय आगे बढ़कर नेतृत्वकारी दायित्व निभाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र को अपनी कमियों और सीमाओं को समझते हुए समय के साथ सुधार की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।
विदेश मंत्री राजधानी स्थित भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय मिशन के 75वें स्थापना वर्ष समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम के दौरान भारत में संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्वयक स्टीफन प्रीसनर भी विशेष रूप से उपस्थित थे।
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि लगभग आठ दशक पूर्व जब इस वैश्विक मंच की नींव रखी गई थी, तब समूचे विश्व के आपसी सहयोग और सामूहिकता के संकल्प को रेखांकित किया गया था। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पहले अनुच्छेद का उल्लेख करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि इस संगठन की मूल परिकल्पना ही साझी प्राथमिकताओं के लिए विभिन्न राष्ट्रों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने वाले केंद्र के रूप में की गई थी।
विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर परस्पर एकजुटता के भाव को मजबूत करना सर्वथा प्रासंगिक है। वर्तमान समय में दुनिया जिन चुनौतियों और अवसरों के दौर से गुजर रही है, उनका समाधान सामूहिक सहभागिता से ही संभव और प्रभावशाली हो सकता है।
व्यावहारिक परिस्थितियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान विश्व व्यवस्था भले ही पूरी तरह परिपूर्ण न हो, लेकिन हर देश निरंतर सुधार और बेहतर व्यवस्था के निर्माण के लिए प्रयासरत रहता है। इसी परिप्रेक्ष्य में संयुक्त राष्ट्र के लिए भी यह अपरिहार्य है कि वह अपनी सीमाओं और कमियों को स्वीकार करे तथा आवश्यक सुधारों को प्राथमिकता दे।



