NCDC महापरिषद की 93वीं बैठक: केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने दिए दीर्घकालिक वित्तीय सुधारों के आदेश, वर्ष 2030-31 तक ₹3.5 लाख करोड़ ऋण वितरण का लक्ष्य

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की महापरिषद की 93वीं बैठक संपन्न हुई, जिसमें आगामी 25 वर्षों के लिए रणनीतिक खाका तैयार करने का निर्देश दिया गया। बैठक में सहकारिता आंदोलन को वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने, पूंजी जुटाने के माध्यमों में विविधता लाने और अंतिम पायदान पर खड़े ग्रामीण नागरिकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने पर केंद्रित विमर्श हुआ। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि NCDC का दीर्घकालिक उद्देश्य ग्रामीण आजीविका और राष्ट्रीय उत्पादकता के बीच ठोस सेतु का निर्माण करना है।
वित्तीय अनुशासन की समीक्षा करते हुए अमित शाह ने कहा कि शून्य नेट एनपीए बनाए रखते हुए भारी वित्तीय विस्तार करना NCDC के पिछले पांच वर्षों के स्वर्णिम काल का परिचायक है। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रगति की वास्तविक सार्थकता तब है जब इसका लाभ छोटे किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण महिलाओं और मछुआरों की आय में तब्दील हो। उन्होंने अमूल, इफको और लिज्जत पापड़ जैसी सहकारी संस्थाओं का उदाहरण देकर समझाया कि उच्च स्तरीय पेशेवर कार्यप्रणाली और सहकारी प्रतिबद्धता एक साथ संभव हैं।
भविष्य के सांगठनिक ढांचे को लेकर सहकारिता मंत्री ने 31 मार्च 2027 के बाद एक विशेष सत्र बुलाने तथा विशेषज्ञों के परामर्श से दिसंबर 2027 तक नीतिगत परिवर्तनों को अंतिम रूप देने का समय निर्धारित किया। उन्होंने वित्तीय निर्भरता को बैंकों और सरकारी बजट से हटाकर नए भागीदारी मॉडल, कंसोर्टियम और सह-वित्तपोषण की ओर ले जाने की वकालत की, जिसमें नाबार्ड तथा वाणिज्यिक बैंकों की सहभागिता शामिल होगी। उन्होंने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL), भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), NCOL, भारत टैक्सी, सहकार सारथी और NUCFDC के विस्तार में NCDC की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष रणनीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने 2030 तक इस क्षेत्र को डेयरी, मत्स्य और पशुपालन में आत्मनिर्भर बनाने का निर्देश दिया, जिससे पूर्वोत्तर की आय में करीब 32,800 करोड़ रुपये की वृद्धि और 8 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है। मत्स्य उद्योग के आधुनिकीकरण के क्रम में 100 डीप-सी ट्रॉलरों के वित्तपोषण का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे जमीनी बदलाव का कारक बताया। साथ ही, कोल्हापुर और पुणे की तर्ज पर चीनी मिलों के लिए साझा प्रसंस्करण और चक्रीय अर्थव्यवस्था आधारित व्यावसायिक मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि सीमित पूंजी वाली मिलें भी आधुनिक तकनीक का उपयोग कर सकें।
संस्थान के वित्तीय लक्ष्यों को रेखांकित करते हुए उन्होंने आने वाले वर्षों में संवितरण का पैमाना लगातार बढ़ाने को कहा—वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये, 2027-28 के लिए 2.10 लाख करोड़ रुपये, 2028-29 के लिए 2.50 लाख करोड़ रुपये और 2029-30 तथा 2030-31 के लिए लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये के संवितरण का लक्ष्य रखा गया है। युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए ‘सहकार मित्र’ योजना के प्रशिक्षुओं को नई सहकारी संस्थाओं से जोड़ने और बनास डेयरी के प्रबंधन तंत्र का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में रखे गए आधिकारिक विवरण के मुताबिक, सहकारिता मंत्रालय बनने से लेकर अक्टूबर 2026 तक NCDC ने सहकारी क्षेत्र में 4.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी वितरित की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान निगम ने 1,55,408 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर कीं, 1,27,596 करोड़ रुपये वितरित किए और 1,475 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया; इस दौरान ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत रही। NCDC (संशोधन) अधिनियम 2026 के जरिए सरकार की 2,000 करोड़ रुपये की सहायता से अगले चार वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये बाजार से जुटाने की व्यवस्था की गई है, जिसके अंतर्गत 2025-26 में 9,380 करोड़ और 2026-27 में 25 अक्टूबर तक 6,172 करोड़ रुपये बांटे गए। इसके अलावा, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के 1,117 संगठनों सहित कुल 1,863 पंजीकृत एफपीओ को 356.90 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, ‘सहकार नवाचार योजना’ के तहत 10 करोड़ के फंड से नवाचारों को 25 लाख रुपये तक का शत-प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, तथा LINAC अकादमी ने 227 सत्रों में 21,688 कर्मियों को प्रशिक्षित कर क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया है।


