भारत और ओमान के बीच नौसैनिक वार्ता संपन्न, समुद्री सुरक्षा और प्रशिक्षण साझेदारी को मजबूत करने पर बनी सहमति

नई दिल्ली में 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित द्विवार्षिक नौसेना स्टाफ वार्ता के आठवें दौर में भारत तथा ओमान ने समुद्री रक्षा समन्वय को और प्रगाढ़ करने का संकल्प लिया। भारतीय नौसेना ने गुरुवार को इस उच्चस्तरीय बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों देशों का मुख्य ध्यान साझा सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटने और नौसैनिक तालमेल को आधुनिक स्वरूप देने पर केंद्रित रहा।
इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय नौसेना की ओर से कमोडोर (विदेशी सहयोग) कार्तिक श्रीमल ने की, जबकि रॉयल नेवी ऑफ ओमान का प्रतिनिधित्व संचालन एवं योजना महानिदेशक कमोडोर अहमद जुमा सलीम अल खत्री ने किया। वार्ता के दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए रणनीतिक संवाद को निरंतर जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
बैठक के एजेंडे में नौसैनिक अभियानों में आपसी सामंजस्य, कर्मियों का उन्नत प्रशिक्षण, खुफिया व तकनीकी सूचनाओं की साझेदारी और हाइड्रोग्राफी (जल सर्वेक्षण) के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशना शामिल रहा। नौसेना ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि इन पहलों का लक्ष्य समुद्री क्षेत्र में उभरते खतरों के विरुद्ध एक मजबूत और प्रभावी तंत्र तैयार करना है।
द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की इसी कड़ी में, भारतीय नौसेना का तीन मस्तूलों वाला प्रसिद्ध प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी इस महीने की शुरुआत में 14 से 17 अक्टूबर तक ओमान के सलालाह बंदरगाह पर मौजूद था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा पोत के महत्वाकांक्षी अंतरमहासागरीय अभियान ‘लोकायन-2026’ का हिस्सा थी, जो अब अपने दसवें महीने में अग्रसर है।
सलालाह बंदरगाह पर प्रवास के दौरान दोनों देशों के नौसैनिकों ने कई पेशेवर सत्रों और संयुक्त खेल आयोजनों में भाग लिया। इन आयोजनों का उद्देश्य न केवल सैन्य समन्वय बढ़ाना था, बल्कि दोनों बलों के बीच सौहार्द और परस्पर समझ को भी मजबूत करना था। रक्षा मंत्रालय ने रेखांकित किया कि यह अभियान नौसैनिक प्रशिक्षुओं में अनुशासन, नेतृत्व और उच्चस्तरीय समुद्री कौशल विकसित करने की भारतीय प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि इस प्रवास के दौरान सलालाह में रह रहे 500 से अधिक प्रवासी भारतीयों, जिनमें स्कूली छात्र और शिक्षक शामिल थे, ने पोत का दौरा किया। नौसैनिक दल ने आगंतुकों को नौकायन पोत के दैनिक कार्यों और समुद्री जीवन की बारीकियों से अवगत कराया, जिससे प्रवासी समुदाय को देश की समुद्री विरासत और सामरिक प्रगति को करीब से अनुभव करने का अवसर प्राप्त हुआ।


