प्रधानमंत्री मोदी ने बनासकांठा से जारी की पीएम-किसान की 24वीं किस्त, गुजरात को मिली 14 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में 14 हजार करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण किया। इन योजनाओं का सीधा संबंध कृषि, पशुपालन, डेयरी, महिला एवं बाल विकास के अलावा रेल, मेट्रो और सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने से है। इसी मंच से प्रधानमंत्री ने पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त भी हस्तांतरित की, जिसके अंतर्गत देशभर के लगभग 10 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि भेजी गई है। इस किस्त के तहत गुजरात के 50 लाख से ज्यादा किसानों को एक हजार करोड़ रुपए से अधिक और बनासकांठा जिले के लाखों किसान परिवारों को लगभग 50 करोड़ रुपए मिले हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसानों को ‘विकसित भारत’ के प्रमुख आधार स्तंभों में से एक बताते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के केंद्र में हमेशा किसान कल्याण रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2013-14 के मुकाबले देश का कृषि बजट पांच गुना से ज्यादा बढ़ाया गया है। पीएम-किसान सम्मान निधि, उर्वरक सब्सिडी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पीएम-कुसुम जैसी पांच प्रमुख योजनाओं के माध्यम से पिछले वर्षों में किसानों को 50 लाख करोड़ रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता या बचत सुनिश्चित हुई है। देश में 85 फीसदी से अधिक संख्या वाले छोटे किसानों को संबल देने के लिए अकेले पीएम-किसान योजना से करीब 4.5 लाख करोड़ रुपए सीधे उनके खातों में पहुंचाए गए हैं। वहीं, बीते 12 वर्षों में धान और गेहूं उत्पादकों को एमएसपी के तौर पर 24 लाख करोड़ रुपए से अधिक दिए गए, जबकि पिछले 10 से 12 सालों में फसल नुकसान की भरपाई के लिए फसल बीमा योजना के तहत दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का मुआवजा वितरित किया गया।
वैश्विक स्तर पर ईरान और खाड़ी देशों के इर्द-गिर्द चल रहे युद्ध व तनाव का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश में उर्वरकों की कमी नहीं होने दी गई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग रसोई गैस और खाद की कमी की अफवाहें फैलाकर समाज में भय और अराजकता का वातावरण बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि सरकार ने करीब 16 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी देकर किसानों को महंगी खाद के बोझ से बचाया है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 3,000 रुपए में मिलने वाली यूरिया की बोरी भारत में 300 रुपए से कम में और 5,000 रुपए से अधिक कीमत वाली डीएपी की बोरी लगभग 1,350 रुपए में किसानों को दी जा रही है। इसके अलावा, सिंचाई लागत घटाने के लिए पीएम-कुसुम योजना के तहत वितरित करीब 12 लाख सोलर पंपों से किसानों के 80 करोड़ लीटर से अधिक डीजल की बचत हुई है। खेती में आधुनिक विज्ञान को बढ़ावा देते हुए पिछले 12 वर्षों में 26 करोड़ से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने हेतु बीजों की लगभग 3,000 नई किस्में तैयार कर किसानों को सौंपी गई हैं।
पशुपालन और डेयरी सेक्टर में महिलाओं की व्यापक भागीदारी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बनासकांठा में बना नया रिसर्च सेंटर राष्ट्रीय गोकुल मिशन को सशक्त करेगा। यहां आईवीएफ जैसी उन्नत तकनीक के जरिए गिर, साहीवाल और कांकरेज जैसी देशी गायों व मेहसाणा, मुर्रा और जाफराबादी भैंसों की नस्ल सुधार पर काम किया जाएगा, जहां कांकरेज नस्ल के लिए यह देश का पहला ऐसा केंद्र है। पशुओं को खुरपका-मुंहपका जैसे रोगों से सुरक्षित रखने के लिए निशुल्क टीकाकरण अभियान के तहत लगभग 150 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं, जिससे आठ करोड़ से अधिक पशुपालक किसानों का आर्थिक बोझ कम हुआ है। बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक देखभाल के चलते प्रति पशु दैनिक दुग्ध उत्पादन का औसत वर्ष 2013-14 के पांच लीटर से कम के स्तर से बढ़कर अब करीब आठ लीटर पहुंच गया है, जिससे भारत विश्व में दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर कायम है।
गांवों में समृद्धि लाने और किसानों की आय के स्रोत बढ़ाने के लिए सरकार दूध के अलावा गोबर व फसल अवशेषों से बायो-सीएनजी, बायोगैस और जैविक खाद बनाने के बुनियादी ढांचे पर जोर दे रही है, जिसके तहत कार्यक्रम में दो बायो-सीएनजी प्लांट का शिलान्यास भी किया गया। प्रधानमंत्री ने बनास डेयरी के सहकारी मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि काशी समेत देश के अन्य भागों को भी इसके अनुभवों का लाभ मिला है। साथ ही, पिछले 12 वर्षों में शहद उत्पादन दोगुना होने से भारत प्राकृतिक शहद का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है और सीफूड निर्यात भी दोगुने से अधिक बढ़ा है। बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत टमाटर, आलू, मिर्च, अंगूर, केला, प्याज, संतरा, अनार और कोको की खेती हेतु 12 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें उत्तर गुजरात के दो क्लस्टर बनासकांठा और साबरकांठा के आलू किसानों को विशेष लाभ पहुंचाएंगे। इसके अलावा, फ्रेंच फ्राइज बनाने वाले आलू संयंत्र की क्षमता में विस्तार किया गया है ताकि किसानों से अधिक आलू खरीदा जा सके।
गुजरात के बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास को गति देते हुए प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद-वाराणसी साबरमती एक्सप्रेस और मेहसाणा-बेचारजी-साबरमती मेमू ट्रेन का शुभारंभ किया, अहमदाबाद मेट्रो विस्तार के साथ गिफ्ट सिटी व एयरपोर्ट को जोड़ने वाली मेट्रो परियोजनाओं की नींव रखी और अहमदाबाद-मेहसाणा हाईवे को चार लेन से आठ लेन में बदलने की योजना की जानकारी दी। महिला एवं बाल कल्याण के तहत प्रदेश में 4,000 से ज्यादा आधुनिक आंगनबाड़ियों की शुरुआत की गई, जिनसे लगभग चार लाख बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सीधा फायदा मिलेगा। 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर गुजरात की जनता के स्नेह व मार्गदर्शन के प्रति आभार जताया और अंतिम सांस तक जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अंत में, उन्होंने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित होने वाले ‘रन फॉर यूनिटी’ और एकता नगर में शाम 5:30 बजे होने वाले एकता पर्व की परेड व झांकियों का उल्लेख करते हुए कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामाख्या तक सभी नागरिकों से राष्ट्रीय एकता का संकल्प मजबूत करने का आह्वान किया।



