गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह: प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल को किया नमन, 50 करोड़ लोगों के गरीबी से उबरने का दिया ब्योरा

गुजरात के एकता नगर में शनिवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय एकता दिवस गरिमामय ढंग से मनाया गया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लौह पुरुष को श्रद्धासुमन अर्पित किए। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि स्वाधीनता के बाद 550 से ज्यादा रियासतों को भारतीय संघ में समाहित करने का कार्य सरदार पटेल के अटूट संकल्प से ही संभव हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों का परस्पर विश्वास और राष्ट्रीय एकता ही मौजूदा दौर में भारत की सबसे प्रभावी शक्ति है।
कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि इस बार समय सारिणी में संशोधन कर मुख्य कार्यक्रम शाम को आयोजित किया गया, ताकि सुबह के समय देशव्यापी ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन निर्बाध संपन्न हो सके। प्रातःकाल देशभर में लाखों नागरिकों, विशेषकर युवाओं ने एकता के संकल्प के साथ इस दौड़ में भागीदारी की। प्रधानमंत्री ने कहा कि गणतंत्र हमें जनता के प्रति जवाबदेही का भान कराता है, जबकि एकता विकास की गति को ऊर्जा प्रदान करती है; यही वजह है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी की तरह ही इस दिन का भी राष्ट्रीय महत्व है।
गरीबी उन्मूलन के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के हवाले से कहा कि वर्ष 2024 से पहले के एक से सवा दशक (10-12 वर्ष) के दौरान 50 करोड़ देशवासी गरीबी के दायरे से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा कि पहले अत्यधिक गरीबी की दर 27 फीसदी से अधिक थी, जो अब सिमटकर 3 फीसदी से भी नीचे पहुंच चुकी है। वैश्विक हालात का विश्लेषण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध, आर्थिक मंदी और टूटी आपूर्ति व्यवस्था के दौर में भारत की आंतरिक एकता ही उसकी ढाल है। उन्होंने रेखांकित किया कि कई राष्ट्रों में ईंधन राशनिंग जैसी स्थितियां बनने के बावजूद भारत ने अपने घरेलू बाजार और नागरिकों को वैश्विक ऊर्जा झटकों से सुरक्षित रखा।
परेड ग्राउंड पर सुरक्षा बलों ने अनुशासित और साहसिक प्रदर्शन किया। इस वर्ष की परेड वामपंथी उग्रवाद के खात्मे में सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका को समर्पित रही, जिसमें 9 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश की 16 टुकड़ियों के अलावा 4 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, एनसीसी और मार्चिंग बैंड सम्मिलित हुए। एनएसजी के जवानों का विशेष मार्च, बीएसएफ व सीआरपीएफ के जांबाजों के साहसिक मोटर साइकिल स्टंट, भारतीय मार्शल आर्ट और वायुसेना के ‘सूर्य किरण’ दस्ते के फ्लाईपास्ट ने समारोह को भव्यता प्रदान की।
कार्यक्रम में ‘नक्सल मुक्त भारत’ के विचार को केंद्र में रखते हुए विशेष प्रस्तुतियां दी गईं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, माओवाद के विरुद्ध सक्रिय रहने वाले सुरक्षा बलों के मार्च के साथ उनकी उपलब्धियों पर आधारित वृत्तचित्र भी दिखाए गए। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के तत्वावधान में पूर्व नक्सल प्रभावित 126 जिलों के लगभग 2,000 कलाकारों ने मंचन के जरिए सुरक्षा और विकास के नए युग का चित्रण किया, जिसे देखने के लिए इन क्षेत्रों के करीब 5,000 लोग पहुंचे थे। वहीं ‘वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 5,000 कलाकारों ने देश की लोक परंपराओं और विविधता को प्रस्तुत किया।
मुख्य समारोह से पहले प्रधानमंत्री ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर सरदार पटेल को नमन किया और एकता नगर के समग्र विकास के लिए 426.71 करोड़ रुपये की 31 परियोजनाओं की सौगात दी। इनमें रेन फॉरेस्ट, इको ट्रेल, आईआरसीटीसी होटल तथा नर्मदा घाट उन्नयन जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। हर वर्ष 31 अक्टूबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय एकता दिवस इस बार भी सुरक्षा बलों के पराक्रम, विविधता में एकता और जनभागीदारी का सशक्त संदेश देने में सफल रहा।



