उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री को सौंपी जीआईएस : 2025 की मशाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को उद्योग क्षेत्र के सहयोग से मजबूत बनाया जाएगा। अन्य देशों से भी मध्यप्रदेश में निवेश आएगा। ऐसी स्थिति में स्थानीय उद्योगपतियों को भी उतना ही महत्व दिया जाएगा। नई तकनीक का उपयोग कर सभी तरह के उद्योगों के विकास और अधिक से अधिक संख्या में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज राज्य शासन के फरवरी 2025 में भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट करने के निर्णय पर उनका आभार व्यक्त करने आए प्रमुख उद्योगपतियों, विभिन्न औद्योगिक संगठन एवं उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कई संस्थाओं ने जीआईएस समिट भोपाल में आयोजित करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उद्योग जगत की ओर से शुभमस्तु कार्यक्रम में धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव को औद्योगिक निवेश के दृढ़ संकल्प एवं विकसित मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए 24 से 30 नवम्बर तक यू.के. और जर्मनी यात्रा के लिए मंगलकामनाएं भी दी गईं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कई तरह के उद्योगों के विकास की संभावनाएं विद्यमान हैं। यदि बात मेडिकल टूरिज्म की करें तो प्रदेश में स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं का निरंतर विस्तार हो रहा है। प्राकृतिक सुंदरता के कारण प्रदेश के कई स्थान पर्यटन क्षेत्र में उद्योगों की संभावनाओं को साकार कर रहे हैं। प्रदेश की राजधानी भोपाल की ही बात करें तो यहाँ राजस्थान के उदयपुर से अधिक संख्या में झीलें हैं, जो पर्यटन के विकास की दृष्टि से किसी भी राज्य के पर्यटन उद्योग से अधिक प्रगति में सहायक है। अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में अब तक दक्षिण भारत ही केन्द्र रहा है। इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश में आवश्यक वातावरण निर्मित किया जा रहा है। युवा वैज्ञानिकों के सम्मेलन के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आईआईटी इंदौर का परिसर उज्जैन में प्रारंभ हो चुका है। इसके अलावा दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए व्यवस्थित और स्वच्छ पशुपालन के लिए पशुपालकों को आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज ही भोपाल के ग्राम सूखी सेवनिया के निकट बरखेड़ी डोब में 25 एकड़ क्षेत्र में 15 करोड़ रूपए लागत की हाईटेक गौ-शाला का भूमिपूजन किया गया है। यहां दस हजार गायों के रहने की क्षमता होगी। भोपाल देश की सबसे स्वच्छ राजधानी है, इस नाते भोपाल के नगरीय क्षेत्र की स्वच्छता में मवेशियों के पालन और रखरखाव के लिए ऐसी हाईटेक गौ-शालाएं हमारी स्वच्छता क्षेत्र की उपलब्धि को कायम रखने में भी सहायक होती हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अभिनंदन के पात्र हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में भारत के 11वें स्थान को 5वें स्थान पर ला दिया है। मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए तेज गति से कार्य कर रहा है। प्रदेश के बजट में प्रतिवर्ष 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जो आने वाले पांच वर्ष में बजट को दोगुना पहुंचाने के लक्ष्य में सहायक होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के लिए उनका आभार माना।

शुभमस्तु कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मध्यप्रदेश में उद्योग संवर्धन प्रयासों के लिए विचार व्यक्त किए गए। श्री दिलीप सूर्यवंशी ने कहा कि बीआरटीएस हटाने का विषय मानवीय संवेदना से ओतप्रोत है। ये हमारे मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विजन है। हाल ही में प्रदेश में सोयाबीन उद्योग के क्षेत्र में नया निवेश आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा व्यक्तिगत रूप से उद्योगपतियों की दिक्कतें दूर करने की पहल की गई है। मध्यप्रदेश के उद्योगपतियों में नया विश्वास पैदा हो रहा है। श्री सूर्यवंशी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भोपाल के नागरिकों की तरफ से धन्यवाद देते हुए कहा कि एक उत्कृष्ट मूर्तिकार हैं, जो मध्यप्रदेश को गढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम में महाकौशल शुगर एंड पावर इंडस्ट्रीज की तरफ से श्री नवाब रज़ा ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यदि डेयरी व्यवसाय में लघु इकाइयां प्रारंभ की जाती हैं, तो कई किसान इसके लिए तैयार हैं। इसके साथ ही किसानों द्वारा जैविक खेती में भी रूचि का प्रदर्शन किया गया है। प्रदेश के बहुत से क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में पशु आहार तैयार हो रहा है, जिसे निर्यात किया जा सकता है। इसके लिए आवश्यक इकाईयों की स्थापना करना लाभप्रद होगा, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। श्री मनोज मिक ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विदेश यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए बताया कि जर्मनी के विश्वविद्यालयों में राजा भोज द्वारा रचित ग्रंथों को पढ़ाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने नगरीयकरण को विस्तार देने की आवश्यकता बताई।

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