मुख्यमंत्री ने सराहा ‘मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना’: विश्व की अनूठी प्रणाली, जो बनी राजगढ़ की समृद्धि का आधार

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजगढ़ जिले की ‘मोहनपुरा-कुंडालिया सिंचाई परियोजना’ को किसानों की खुशहाली और क्षेत्र की समृद्धि का आधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह अनूठी परियोजना हर खेत तक पानी पहुँचाने के साथ ही उद्योगों और पेयजल के लिए पानी उपलब्ध कराकर नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ा रही है, जिससे आम जीवन सुखमय हो रहा है।
‘पर ड्रॉप, मोर क्रॉप’ की अवधारणा फलीभूत मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को “प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क” प्रणाली पर आधारित विश्व की एक अनूठी सिंचाई परियोजना बताया। यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ‘पर ड्रॉप, मोर क्रॉप’ (प्रति बूंद अधिक फसल) की अवधारणा को मध्य प्रदेश में पूरा कर रही है। इसकी सफलता ऐसी है कि भारत के साथ-साथ विदेशों के प्रतिनिधिमंडल भी इसका अध्ययन करने आ रहे हैं। इस जल-संसाधन प्रबंधन के लिए इसे भारत सरकार का प्रतिष्ठित ‘सीबीआईपी’ पुरस्कार भी मिल चुका है।
तकनीकी विशेषताएँ:
- यह परियोजना नेवज नदी पर मोहनपुरा बांध और कालीसिंध नदी पर कुंडालिया बांध बनाकर शुरू की गई थी।
- यह प्रणाली भूमिगत पाइप से सीधे खेत तक दबाव के साथ पानी पहुँचाती है, जिससे ऊँचे खेतों पर भी पानी आसानी से पहुँचता है।
- परियोजना में लगभग 26 हजार किमी लंबी भूमिगत प्रेशराइज्ड पाइपलाइन बिछाई गई है, जो विश्व में एक मिसाल है।
- पानी को दबाव के साथ भेजने के लिए 20 बड़े पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं।
- ‘स्काडा’ (SCADA) आधारित ऑटोमेशन और सेंसर यह तय करते हैं कि फसलों की जरूरत के अनुसार किस क्षेत्र में कितना पानी पहुँचेगा।
- पूरी प्रणाली में लगभग 1.5 लाख सेंसर्स और कंट्रोलर को ‘ला-रा’ (LoRa) नेटवर्क का उपयोग करके जोड़ा गया है, जो सौर ऊर्जा से चलते हैं।
- पंपिंग स्टेशन में लगे ‘वैरिएबल फ्रीकवैन्सी ड्राइव्ज’ (VFD) फसलों की जरूरत और मौसम के अनुसार पानी का दबाव और मात्रा नियंत्रित करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्रांतिकारी सोच ने सूखाग्रस्त राजगढ़ जिले की किस्मत बदल दी है। केंद्रीकृत पंपिंग प्रणाली से हर साल लगभग 69 मिलियन यूनिट बिजली की बचत भी होती है। यह आधुनिक सिंचाई प्रणाली आज पूरे विश्व के लिए पानी के इष्टतम उपयोग का एक अनूठा उदाहरण बन गई है।


