कॉप-30 में भारत का रुख: मुख्य बातें

बेलेम, ब्राजील में आयोजित यूएनएफसीसीसी कॉप-30 के नेताओं के शिखर सम्मेलन में, भारत ने 07 नवंबर, 2025 को अपना राष्ट्रीय वक्तव्य जारी किया। वक्तव्य के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • मूल सिद्धांत: भारत ने समानता, राष्ट्रीय परिस्थितियों और साझा लेकिन विभेदित उत्तरदायित्वों और संबंधित क्षमताओं (सीबीडीआर-आरसी) के सिद्धांतों पर आधारित जलवायु कार्रवाई के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई।
  • विकसित देशों से अपेक्षा:
    • विकसित देशों को उत्सर्जन में कमी लाने में तेजी लानी चाहिए
    • उन्हें वादा किया गया, पर्याप्त और पूर्वानुमानित समर्थन प्रदान करना चाहिए।
    • ज़ोर दिया गया कि महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्यों को लागू करने के लिए न्यायसंगत, पूर्वानुमानित और रियायती जलवायु वित्त अत्यंत आवश्यक है।
  • ब्राजील की पहल का समर्थन: भारत ने उष्णकटिबंधीय वन संरक्षण हेतु स्‍थायी सुविधा (टीएफएफएफ) स्थापित करने की ब्राजील की पहल का स्वागत किया और इसमें एक पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुआ।
  • भारत की प्रगति (2005-2020/2021):
    • सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी
    • गैर-जीवाश्म ऊर्जा अब स्थापित क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक है (संशोधित एनडीसी लक्ष्य समय से पाँच वर्ष पहले हासिल)।
    • 2005 से 2021 के बीच 2.29 बिलियन टन CO2 समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक निर्मित हुआ।
    • भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक है।
  • भविष्य का आह्वान: भारत ने सभी राष्ट्रों से अगले दशक की जलवायु कार्रवाई को कार्यान्वयन, लचीलापन और पारस्परिक विश्वास व निष्पक्षता पर आधारित साझा जिम्मेदारी से परिभाषित करने का आह्वान किया।

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