शक्सगाम घाटी पर चीन-पाकिस्तान का समझौता अवैध: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने विस्तारवादी मंसूबों को नकारा

चीन की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ भारत ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। लद्दाख के एलजी कवींद्र गुप्ता ने चीन के दावों को सख्ती से खारिज करते हुए चेतावनी दी है कि भारत अब 1962 की स्थिति में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा पीओके (PoK) भारत का हिस्सा है और चीन को यह समझ लेना चाहिए कि उसकी चालबाजियां अब सफल नहीं होंगी। उनके इस बयान का समर्थन करते हुए सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी शक्सगाम घाटी में चल रहे चीनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कड़ी आलोचना की।
शक्सगाम घाटी, जिसे ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है, काराकोरम पर्वत श्रृंखला में सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर-पूर्व में स्थित है। वर्तमान में इस पर चीन का नियंत्रण है, लेकिन भारत इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-चीन-पाकिस्तान की त्रिकोणीय सीमा के पास होने के कारण यह क्षेत्र रणनीतिक संपर्क के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। भारत सरकार अब इस क्षेत्र में हो रही हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रही है।
मुख्य जानकारी:
-
सेना प्रमुख का बयान: जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि शक्सगाम घाटी में चीन का निर्माण कार्य और पाकिस्तान के साथ उसका समझौता अवैध है।
-
विवाद की जड़: 1963 में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का उत्तरी हिस्सा (शक्सगाम वैली) चीन को उपहार स्वरूप दे दिया था। भारत इसे सिरे से खारिज करता है क्योंकि पाकिस्तान का उस जमीन पर कोई मालिकाना हक नहीं था।
-
LG कवींद्र गुप्ता की चेतावनी: उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने चीन के साथ क्या सौदा किया, इससे भारत को फर्क नहीं पड़ता। भारत अपनी सीमा की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी साजिश को नाकाम कर देगा।
-
क्यों खास है यह क्षेत्र? शक्सगाम वैली सियाचिन ग्लेशियर और लद्दाख की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। यह क्षेत्र भारत, चीन और पाकिस्तान तीनों की सीमाओं के करीब स्थित है।
-
भारत का रुख: भारत ने साफ कर दिया है कि वह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC 2.0) और इस क्षेत्र में किए जा रहे किसी भी अवैध कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा।



