नासा और भारतीय वैज्ञानिकों का संयुक्त विश्लेषण: अंतरिक्ष यानों के डेटा से सुलझी ‘मैग्नेटिक क्लाउड’ की गुत्थी

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के शोधकर्ताओं ने नासा के मल्टी-स्पेसक्राफ्ट डेटा का उपयोग करके अंतरग्रहीय कोरोनल मास इजेक्शन (ICME) के विकास का नक्शा तैयार किया है।

तकनीकी डेटा के महत्वपूर्ण बिंदु:

  • बहु-अंतरिक्ष यान प्रेक्षण: इस अध्ययन में सोलर डायनेमिक ऑब्जर्वेटरी (SDO), सोलर ऑर्बिटर (SolO), स्टीरियो-ए (STEREO-A) और विंड (WIND) जैसे कई यानों के डेटा का विश्लेषण किया गया।

  • विस्तार और वेग: प्रेक्षणों से पता चला कि जैसे-जैसे यह चुंबकीय बादल सूर्य से दूर बढ़ा, इसका आकार बढ़ता गया (SolO पर 0.08 AU से स्टीरियो-ए पर 0.18 AU तक)। हालांकि, इसकी विस्तार गति और वेग में कमी दर्ज की गई।

  • चुंबकीय संरचना: प्रसार के दौरान चुंबकीय क्षेत्र की संरचना में घूर्णन (Rotation) देखा गया, जिसकी हेलिसिटी (Helicity) उसके स्रोत क्षेत्र के अनुरूप थी। यह जानकारी अंतरिक्ष में चुंबकीय क्षेत्रों के व्यवहार को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने मार्च 2023 की एक दुर्लभ सौर घटना का अध्ययन कर यह पता लगाया है कि कैसे सूर्य पर बिना किसी बड़े विस्फोट के भी पृथ्वी पर तीव्र भूचुंबकीय तूफान आ सकते हैं। इसे ‘स्टील्थ सीएमई’ (Stealth CME) या गुप्त कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष:

  • बिना चेतावनी का खतरा: आम तौर पर शक्तिशाली सीएमई के साथ एक्स-रे फ्लेयर्स या रेडियो विस्फोट होते हैं, जो चेतावनी का काम करते हैं। लेकिन यह गुप्त सीएमई बिना किसी मानक सौर संकेत के पृथ्वी की ओर बढ़ा, जिससे इसका पूर्वानुमान लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया।

  • कोरोनल होल की भूमिका: IIA के शोधकर्ता पी. वेमारेड्डी के अनुसार, सूर्य के पास मौजूद ‘कोरोनल होल’ (सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र में छिद्र) ने इस कमजोर विस्फोट को सहारा दिया। कोरोनल होल से निकली सौर पवनों ने इस सूक्ष्म सीएमई को सूर्य के पास खत्म होने के बजाय पृथ्वी तक धकेल दिया।

  • अदृश्य शक्ति: लगभग 10% तीव्र भूचुंबकीय तूफान ऐसे ही कमजोर या गुप्त विस्फोटों से पैदा होते हैं, जो वर्तमान तकनीक से दिखाई नहीं देते।

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