राज्यसभा अपडेट: 2032 तक तीन गुना होगी परमाणु ऊर्जा क्षमता, डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी विस्तृत जानकारी

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के भविष्य को लेकर एक विस्तृत और महत्वाकांक्षी योजना प्रस्तुत की। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि भारत का परमाणु कार्यक्रम अब ‘विस्तार के निर्णायक चरण’ में प्रवेश कर चुका है।
मुख्य बिंदु:
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क्षमता विस्तार: 2014 में जो क्षमता 4,780 मेगावाट थी, वह अब बढ़कर 8,780 मेगावाट हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे 2031-32 तक 22,380 मेगावाट और 2047 तक 100 गीगावाट तक ले जाने का है।
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कुडनकुलम परियोजना: मंत्री ने स्पष्ट किया कि कुडनकुलम की इकाइयां 3 और 4 (2026-27 तक) और इकाइयां 5 और 6 (2030 तक) पूरी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक बदलावों का इन परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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जैतापुर प्रोजेक्ट: जैतापुर में 6×1600 मेगावाट के रिएक्टरों के लिए तकनीकी ढांचा तैयार है, हालांकि कुछ वाणिज्यिक मुद्दों पर बातचीत अभी जारी है।
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बिजली का बँटवारा: गाडगिल फॉर्मूले के तहत, परमाणु संयंत्र से उत्पन्न 50% बिजली मेजबान राज्य को, 35% पड़ोसी राज्यों को और 15% केंद्रीय ग्रिड को दी जाती है।
राज्यसभा में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब केवल बाहरी यूरेनियम या विदेशी सहायता पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपनी स्वदेशी क्षमताओं को तेजी से मजबूत कर रहा है।
रणनीतिक पहल:
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नीतिगत सुधार: सरकार ने 2035 तक परमाणु संयंत्र उपकरणों के आयात पर ‘शुल्क छूट’ जैसे कदम उठाए हैं ताकि घरेलू क्षमता को गति मिल सके।
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सुरक्षा सर्वोपरि: डॉ. सिंह ने “सुरक्षा पहले, उत्पादन बाद में” के सिद्धांत को दोहराया। उन्होंने कुडनकुलम में ईंधन भंडारण से जुड़ी शंकाओं को वैज्ञानिक रूप से निराधार बताया।
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सामाजिक उत्तरदायित्व: NPCIL द्वारा स्थानीय समुदायों के विकास के लिए चालू वित्त वर्ष में 168 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं।
मुख्य जानकारी:
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लक्ष्य: 2031-32 तक 22 गीगावाट और आजादी के अमृत काल (2047) तक 100 गीगावाट का लक्ष्य निर्धारित।
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प्रगति: 2014 के बाद से परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी हो चुकी है।
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कुडनकुलम: इकाइयां 3 से 6 निर्धारित समय पर हैं; लागत बढ़ने या देरी की कोई आशंका नहीं है।
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जैतापुर वार्ता: फ्रांस के साथ 9600 मेगावाट की परियोजना पर वाणिज्यिक चर्चा प्रगति पर है।
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स्थानीय लाभ: प्रभावित क्षेत्रों के 16 किमी के दायरे में बुनियादी ढांचे और कौशल विकास के लिए भारी निवेश किया जा रहा है।



