मौसम अपडेट :

देश के मौसम चक्र में इस समय एक साथ दो विपरीत स्थितियाँ देखने को मिल रही हैं। जहाँ एक ओर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 13 से 16 फरवरी के बीच दो ‘वेस्टर्न डिस्टरबेंस’ (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मैदानी राज्यों में गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और बारिश की संभावना है।
मैदानी इलाकों में गर्मी का तांडव उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में वसंत से पहले ही गर्मी का अहसास होने लगा है। उत्तर प्रदेश के बांदा में अधिकतम तापमान 31.2°C और प्रयागराज में 30.4°C दर्ज किया गया है। मध्य प्रदेश के 15 से अधिक शहरों में पारा 30°C की रेखा लांघ चुका है। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में तापमान 32.7°C तक पहुँच गया है, जो इस सीजन का अब तक का उच्चतम स्तर है।
पहाड़ों की स्थिति: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत का कहर जारी है। मुनस्यारी में न्यूनतम तापमान -26°C रिकॉर्ड किया गया है, जो हाड़ कपा देने वाली ठंड का प्रमाण है। गंगोत्री (-21°C) और बद्रीनाथ (-19°C) में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर की मुगल रोड कई फीट बर्फ के कारण बंद है, जिससे संपर्क मार्ग ठप पड़े हैं।
मैदानी राज्यों का पूर्वानुमान:
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राजस्थान: 17 और 18 फरवरी को नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण जयपुर और बीकानेर संभाग में बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
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हरियाणा और पंजाब: हरियाणा के 7 जिलों में तापमान 25°C के पार है, जबकि पंजाब में 17 फरवरी को बारिश की संभावना है। फिरोजपुर में पारा 26.6°C तक जा पहुँचा है।
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बिहार और झारखंड: बिहार में सुबह धुंध के बाद दिन में तेज धूप निकल रही है, जिससे न्यूनतम तापमान 11-12°C के करीब है। झारखंड में डाल्टेनगंज और खूंटी जैसे जिलों में रात का पारा 10°C से नीचे बना हुआ है।
अगले दो दिनों का विशेष पूर्वानुमान:
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15 फरवरी: हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में ‘यलो अलर्ट’ के साथ घना कोहरा छाएगा। सुदूर उत्तर-पूर्व में अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ आंधी और बारिश की आशंका है।
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16 फरवरी: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में फिर से बर्फबारी का दौर शुरू होगा, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी।
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17 फरवरी: उत्तराखंड के 5 जिलों में बारिश और बर्फबारी की प्रबल संभावना है, जबकि हरियाणा और पंजाब के मैदानी इलाकों में गरज के साथ छींटें पड़ सकते हैं।



