₹40,000 करोड़ की बचत और 18,000 केंद्रों का जाल: जन औषधि योजना ने बदली भारतीय स्वास्थ्य सेवा की तस्वीर

जन औषधि दिवस 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘भारतीय जन औषधि परियोजना’ गुणवत्तापूर्ण दवाओं को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस पहल के माध्यम से लाखों परिवार अपने स्वास्थ्य बजट में बचत कर पा रहे हैं।

जन औषधि योजना केवल सस्ती दवाओं का जरिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की लहर बन गई है। 2014 में जहाँ इन केंद्रों की कुल बिक्री मात्र 7.29 करोड़ रुपये थी, वहीं आज यह आंकड़ा 2,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। हर दिन लगभग 15 लाख लोग इन केंद्रों पर भरोसा जता रहे हैं।

इस योजना का एक बड़ा पहलू महिला सशक्तिकरण भी है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में खुले नए केंद्रों में से लगभग 60% का संचालन महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा, मात्र 1 रुपये में उपलब्ध सेनेटरी पैड्स की 100 करोड़ से अधिक की बिक्री ने महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति एक नई चेतना जगाई है। 29 विभिन्न उपचार श्रेणियों की दवाओं की उपलब्धता ने इसे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए ‘वन-स्टॉप’ समाधान बना दिया है।

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