मध्य पूर्व में अशांति से विमानन क्षेत्र प्रभावित; 5,522 उड़ानें रद्द, डीजीसीए रख रहा है स्थिति पर पैनी नजर

नई दिल्ली: बजट सत्र के छठे दिन संसद में पश्चिम एशिया संकट और उसके भारतीय विमानन क्षेत्र पर प्रभाव को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापू राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण उड़ानों का संचालन करना यात्रियों के जीवन को जोखिम में डालने जैसा है।
प्रमुख बिंदु और परिचालन चुनौतियां:
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हवाई क्षेत्र का बंद होना: मंत्री ने कहा कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों के ऊपर से उड़ान भरना संभव नहीं है, जिसके कारण भारतीय एयरलाइंस को अपनी 4,335 से अधिक सेवाओं को रद्द करने का कठिन निर्णय लेना पड़ा।
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नियामक की भूमिका: डीजीसीए वर्तमान में वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत स्थिति की निगरानी कर रहा है। मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों के अनुरूप यह सुनिश्चित कर रहा है कि केवल सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग किया जाए।
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भविष्य की योजना: उड़ान सेवाओं की बहाली पूरी तरह से प्रभावित क्षेत्रों में शांति और एयरस्पेस के दोबारा खुलने पर निर्भर है।
पायलट शक्ति का प्रदर्शन: इसी सत्र के दौरान, मंत्रालय ने देश की विमानन क्षमता का एक अन्य पहलू भी प्रस्तुत किया। पिछले सप्ताह राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में वर्तमान में 11,394 पायलट सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि इनमें 1,871 महिला पायलट शामिल हैं, जो भारतीय उड्डयन की बढ़ती विशेषज्ञता और समावेशिता का प्रमाण है।



