वैश्विक तेल बाजार में हलचल के बीच रूस ने गैसोलीन निर्यात पर लगाया अस्थायी प्रतिबंध

रूस ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के मद्देनज़र 1 अप्रैल से घरेलू उत्पादकों के गैसोलीन निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है। यह प्रतिबंध 31 जुलाई तक लागू रहेगा। इस संबंध में जानकारी उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने शुक्रवार को दी।
रूस सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस फैसले से पहले उपप्रधानमंत्री नोवाक ने ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस बैठक में ऊर्जा मंत्री, फेडरल एंटीमोनोपॉली सर्विस, सेंट पीटर्सबर्ग एक्सचेंज और विभिन्न औद्योगिक कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह कदम उठाया गया।
सरकारी समाचार एजेंसी टास के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रण में रखना है। बैठक के दौरान नोवाक ने कहा कि वैश्विक तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बाजार में इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद, विदेशी बाजारों में रूसी ऊर्जा संसाधनों की मांग मजबूत बनी हुई है, जो देश के लिए सकारात्मक संकेत है।
ऊर्जा मंत्री ने यह भी बताया कि तेल रिफाइनिंग का स्तर मार्च 2025 के समान बना हुआ है, जिससे देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति स्थिर रहने की संभावना है। औद्योगिक कंपनियों ने भी आश्वासन दिया है कि वे घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ईंधन भंडार बनाए हुए हैं और रिफाइनिंग क्षमता का अधिकतम उपयोग कर रहे हैं।
उधर, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। आमतौर पर इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल का परिवहन होता है, लेकिन ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच संघर्ष के चलते शिपिंग में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ी है और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल देखा गया है।
स्थिति को संभालने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसका नेतृत्व जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा कर रहे हैं। इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि अली बहरीनी ने कहा कि ईरान ने यूएन की अपील को स्वीकार करते हुए मानवीय सहायता से जुड़े जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने में सहयोग करने पर सहमति जताई है। यूएन प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के अनुसार, यह पहल सफल होने पर कूटनीतिक समाधान के प्रति विश्वास को मजबूत कर सकती है और व्यापक राजनीतिक समाधान की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।



