अब चंबल के दुर्लभ कछुए साफ कर रहे हैं गंगा का पानी, सीएम डॉ. मोहन यादव ने सराहा प्रयास

मध्यप्रदेश अब केवल बाघों और चीतों का ही नहीं, बल्कि दुर्लभ कछुओं का भी गढ़ बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि कैसे चंबल नदी के कछुए अब गंगा नदी के ‘सफाई कर्मचारी’ बनकर काम कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला? नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत चंबल से दुर्लभ ‘बटागुर’ कछुओं को गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है। ये कछुए पानी में मौजूद कचरे और गंदगी को खाकर नदी को साफ रखते हैं। इसका असर भी दिखने लगा है:

  1. वाराणसी और पटना जैसे शहरों में गंगा का पानी पहले से कहीं अधिक साफ हुआ है।

  2. प्रदूषण फैलाने वाले बैक्टीरिया (FC) के स्तर में कमी आई है।

  3. पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी है, जिससे अन्य मछलियां और जीव भी सुरक्षित हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीवों की रक्षा करना ईश्वर की पूजा करने जैसा है। मध्यप्रदेश सरकार के इन प्रयासों से न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि हमारी नदियां भी फिर से जीवित हो उठेंगी। चंबल में कछुओं की 9 ऐसी प्रजातियां हैं जो दुनिया में कहीं और मिलना मुश्किल हैं, और अब ये ‘जलीय योद्धा’ हमारी राष्ट्रीय नदी गंगा को स्वच्छ बनाने के मिशन पर तैनात हैं।

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