मध्यप्रदेश में गो-सेवा के साथ तकनीक का संगम: हाइड्रोलिक लिफ्ट से लेकर सीएनजी प्लांट तक, गो-संवर्धन में अग्रणी बना प्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश गो-संरक्षण के क्षेत्र में देश का रोल मॉडल बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि गो-सेवा केवल आस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। प्रदेश सरकार ने गौशालाओं के चारा-भूसा अनुदान के लिए 505 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है।

नवाचार और आधुनिक सुविधाएं:

  • हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग: घायल और असहाय गायों को सुरक्षित लाने-ले जाने के लिए हाइड्रोलिक वाहनों की व्यवस्था की जा रही है।

  • बड़ी गौशालाएं: आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन में आदर्श गौशालाएं संचालित हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में निर्माण अंतिम चरणों में है।

  • दुग्ध संग्रहण लक्ष्य: प्रतिदिन 50 लाख लीटर दुग्ध संग्रहण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 1,181 नई सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है और पुरानी निष्क्रिय समितियों को फिर से जीवित किया गया है।

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को अभी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन को वैज्ञानिक पद्धति से बढ़ाना है।

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