मार्च में थोक महंगाई 3.88% पर पहुंची, 38 महीने का उच्च स्तर

मार्च 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 3.88% हो गई है, जो फरवरी में 2.13% थी। इस तरह एक महीने में 1.75% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने 15 अप्रैल को ये आंकड़े जारी किए। यह स्तर पिछले 38 महीनों में सबसे ऊंचा है, इससे पहले जनवरी 2023 में थोक महंगाई 4.73% रही थी।

थोक महंगाई में यह वृद्धि मुख्य रूप से रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण हुई है। प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर 3.27% से बढ़कर 6.36% हो गई है। वहीं, खाने-पीने की वस्तुओं का फूड इंडेक्स 1.85% पर स्थिर बना हुआ है।

फ्यूल और पावर श्रेणी में भी उल्लेखनीय बदलाव देखा गया है। इसकी महंगाई दर माइनस 3.78% से बढ़कर 1.05% हो गई है। इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की थोक महंगाई दर 2.92% से बढ़कर 3.39% दर्ज की गई है।

थोक महंगाई सूचकांक में विभिन्न घटकों का अलग-अलग वेटेज होता है। प्राइमरी आर्टिकल्स का वेटेज 22.62%, फ्यूल एंड पावर का 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का सबसे अधिक 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल्स के अंतर्गत खाद्य पदार्थ, नॉन-फूड आइटम जैसे ऑयल सीड, मिनरल्स और क्रूड पेट्रोलियम शामिल हैं।

इसी दौरान मार्च में रिटेल महंगाई भी बढ़कर 3.4% पर पहुंच गई, जो फरवरी में 3.21% थी। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है।

लंबे समय तक थोक महंगाई ऊंची रहने से उत्पादन क्षेत्रों पर दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में उत्पादक बढ़ी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं। सरकार करों के माध्यम से ही WPI को सीमित रूप से नियंत्रित कर सकती है, जैसे पहले कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के दौरान ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई थी।

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