महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष के रुख को लेकर पीयूष गोयल का हमला, कहा—‘बेहद परेशान करने वाला और शर्मनाक’

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित न होने पर विपक्ष की तीखी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से संबंधित बिल को रोकने के साथ-साथ उसके रुकने का जश्न भी मनाया।
शुक्रवार को सदन में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि जो कुछ हुआ वह “बेहद परेशान करने वाला और शर्मनाक” था। उनके अनुसार, विपक्षी दलों ने न केवल विधेयक का विरोध किया, बल्कि उसे पारित होने से रोकने के बाद नारेबाजी भी की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में गोयल ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य दलों पर आरोप लगाया कि वे चर्चा के लिए नहीं, बल्कि बिल को रोकने के उद्देश्य से एकजुट हुए थे। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था, जिसे न केवल खारिज किया गया, बल्कि इसके बाद जश्न भी मनाया गया।
गोयल ने इसे विरोध की सामान्य राजनीति नहीं, बल्कि महिलाओं के साथ “सोच-समझकर किया गया विश्वासघात” बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस बात का जश्न मनाया जा रहा था और कहा कि इस तरह का व्यवहार पितृसत्तात्मक सोच को बढ़ावा देने और महिलाओं के अधिकारों को दबाने के समान है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष ने विधेयक को रोककर महिलाओं को विधायी संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व से वंचित कर दिया। उन्होंने इसे एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा बताते हुए कहा कि विपक्षी दल महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ खड़े नजर आते हैं और राजनीतिक हितों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से ऊपर रखते हैं।
गोयल ने कहा कि यह कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि एक पैटर्न को दर्शाती है। उनके अनुसार, विपक्ष का रवैया न तो महिलाओं के हित में है और न ही देश की आकांक्षाओं के अनुरूप।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे के राजनीतिक परिणाम सामने आएंगे और महिला मतदाता इन घटनाओं को याद रखेंगी। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह अपमान न तो भुलाया जाएगा और न ही माफ किया जाएगा, और इसकी गूंज देश के हर चुनाव में सुनाई देगी।
केंद्रीय मंत्री ने अंत में कहा कि विपक्ष को इस कदम की “राजनीतिक कीमत” चुकानी पड़ेगी, जो न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि देशभर के अन्य चुनावों में भी दिखाई देगी।



