पश्चिम बंगाल में राशन वितरण घोटाले पर ईडी का बड़ा प्रहार, 9 स्थानों पर छापेमारी

पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राशन वितरण (पीडीएस) घोटाले की जांच तेज कर दी है। शनिवार को केंद्रीय एजेंसी ने कोलकाता, बर्धवान और उत्तर 24 परगना के हाबरा सहित कुल 9 ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन सप्लायरों और निर्यातकों पर केंद्रित थी, जिनके तार इस कथित भ्रष्टाचार से जुड़े होने का संदेह है।
ईडी के कोलकाता जोनल कार्यालय की टीम ने यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की। जांच एजेंसी के निशाने पर मुख्य रूप से आरोपी निरंजन चंद्र साहा और उनसे संबंधित अन्य व्यक्ति थे। इसी सिलसिले में हाबरा में एक प्रमुख व्यवसायी के ठिकानों पर भी दबिश दी गई।
इस मामले की जड़ें अक्टूबर 2020 में बशीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी (एफआईआर) से जुड़ी हैं। यह एफआईआर घोझाडांगा एलसीएस के सीमा शुल्क उपायुक्त की शिकायत पर आधारित थी। शिकायत में गंभीर आरोप लगाया गया था कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए आरक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गेहूं की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी और हेराफेरी की जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय की अब तक की जांच में एक सोची-समझी साजिश का खुलासा हुआ है। इसके तहत लाइसेंसधारक वितरकों, डीलरों और बिचौलियों ने साठगांठ कर लाभार्थियों के हक का गेहूं बाजार से कम दामों पर अवैध रूप से खरीदा। आरोपियों ने इस स्टॉक की पहचान छिपाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफ़सीआई) और राज्य सरकार की मुहर वाली मूल बोरियों को बदलकर गेहूं को नई बोरियों में भरा, ताकि इसे खुले बाजार में वैध स्टॉक के रूप में बेचा जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए आरोपियों ने ‘अपराध की कमाई’ (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के रूप में भारी अवैध मुनाफा कमाया।


