मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को नई गति: एक्सप्रेसवे और रिंग रोड से सुधरेगी कनेक्टिविटी, सीएम डॉ. मोहन यादव ने की समीक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सड़क बुनियादी ढांचे में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों की समीक्षा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में सड़क निर्माण के कार्य अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहे हैं। वर्तमान में लोक निर्माण विभाग (PWD) 77 हजार किलोमीटर से अधिक के विशाल सड़क नेटवर्क का प्रबंधन कर रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 11,632 किमी सड़कों का सुदृढ़ीकरण और 190 पुलों व फ्लाई ओवरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जबकि 16,954 किमी लंबी सड़क परियोजनाएं और 531 पुलों का काम तेजी से प्रगति पर है। प्रदेश के प्रमुख महानगरों—भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन—में रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है, जिससे शहरी यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा।

मुख्यमंत्री ने अधोसंरचना के लिए वित्तीय और तकनीकी सुदृढ़ीकरण पर जोर देते हुए बताया कि NHAI के साथ लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण समझौता किया गया है। इसमें से 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए ‘प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PMS 2.0)’ लागू किया गया है। डॉ. यादव ने सख्त लहजे में कहा कि गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है; पिछले 13 महीनों में औचक निरीक्षण के बाद 25 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।

तकनीकी नवाचारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘लोकपथ मोबाइल ऐप 2.0’ और ‘लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप’ की जानकारी दी। लोकपथ 2.0 ऐप नागरिकों के लिए ‘स्मार्ट ट्रैवल गाइड’ के रूप में कार्य करेगा, जो ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) से 500 मीटर पहले चेतावनी देने के साथ-साथ SOS और रूट प्लानर जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। विभाग ने GIS आधारित बजट मॉड्यूल भी शुरू किया है, जिससे विकास कार्यों में दोहराव खत्म हुआ है और डिजिटल मानचित्र के माध्यम से बजट आवंटन अधिक सटीक हो गया है।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क निर्माण अब ‘ईको-फ्रेंडली’ तकनीक से हो रहा है। खुदाई के स्थानों को ‘लोक कल्याण सरोवर’ के रूप में बदला जा रहा है, जिसके तहत 506 सरोवर बनाए जा चुके हैं और 600 नए विकसित करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही, फ्लाई ओवरों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और सड़क किनारे भूजल रिचार्ज जैसे नवाचार किए जा रहे हैं। ‘समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान’ के जरिए अब औद्योगिक क्षेत्रों और जिला मुख्यालयों के बीच की दूरी कम करने के लिए 6 नए ग्रीनफील्ड मार्ग भी चिन्हित किए गए हैं।

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