‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने डिजिटल जनगणना और पवन ऊर्जा की प्रगति पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें अंक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश में चल रहे आगामी जनगणना अभियान को दुनिया का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण मिशन बताया। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि जिन राज्यों में स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां मकानों की सूची बनाने का कार्य निरंतर जारी है और अब तक लगभग 1.20 करोड़ परिवारों के घरों की लिस्टिंग सफलतापूर्वक संपन्न की जा चुकी है।
जनगणना की प्रक्रिया को सरल बनाने पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस बार नागरिकों के अनुभव पूर्व की तुलना में काफी अलग और सुलभ होंगे। डिजिटल सुविधाओं के तहत लोग अब स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। प्रगणक (कर्मचारी) के घर आने से 15 दिन पहले यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके बाद प्राप्त विशेष आईडी को दिखाकर डेटा की पुष्टि की जा सकेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि जानकारी को दोबारा देने की जटिलता भी समाप्त हो जाएगी।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषयों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बुद्ध पूर्णिमा की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान बुद्ध के ‘स्वयं पर विजय’ के संदेश को आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक बताया। साथ ही, उन्होंने कच्छ के रण में आने वाले लाखों फ्लेमिंगो (हंसवार) पक्षियों का जिक्र करते हुए उन्हें ‘लाखा जी के बाराती’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक बन चुके ये पक्षी पूरे क्षेत्र को एक अनूठी पहचान प्रदान करते हैं।
देश की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत पवन ऊर्जा (विंड एनर्जी) के क्षेत्र में 56 गीगावॉट की क्षमता पार कर चुका है। पिछले मात्र एक वर्ष में ही इसमें 6 गीगावॉट की नई क्षमता जोड़ी गई है। उन्होंने गुजरात, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे राज्यों की सराहना करते हुए कहा कि सौर और पवन ऊर्जा के हब बनने से इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और कौशल विकास के रास्ते खुल रहे हैं।
अंत में प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर भारत के ‘बंबू सेक्टर’ (बांस उद्योग) में आई क्रांति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि साल 2017 में कानून में किए गए ऐतिहासिक बदलाव के बाद, जिसमें बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर किया गया था, अब पूर्वोत्तर के लोगों के लिए इस क्षेत्र में व्यापार करना आसान हो गया है। अंग्रेजों के समय के कड़े नियमों के हटने से आज यह सेक्टर निरंतर फल-फूल रहा है।


