मौसम अपडेट :

उत्तर और मध्य भारत में सूरज की तपिश ने रिकॉर्ड तोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे देश के कई हिस्से लू की चपेट में हैं। शनिवार को उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिसने पिछले चार वर्षों का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में भी पारा 45 डिग्री के पार बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश राज्यों में तीव्र हीटवेव और रात के समय भी अधिक तापमान रहने की चेतावनी जारी की है।

प्रशासनिक स्तर पर गर्मी से बचाव के लिए कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन में छोटे बच्चों के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। बिहार के कुछ जिलों में स्कूल संचालकों ने विद्यार्थियों को चिलचिलाती धूप से सुरक्षित रखने के लिए छातों का प्रबंध किया है। केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी पारा 40 डिग्री के स्तर को छू रहा है, जिससे वहां उमस और गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में इस भीषण गर्मी का सीधा असर देखने को मिला है, जहाँ देश की कुल बिजली मांग 252.07 गीगावॉट के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। मौसम के बदलते मिजाज के बीच वर्ल्ड वेदर ऑर्गनाइजेशन ने चिंताजनक रिपोर्ट दी है कि अल नीनो का प्रभाव मई माह से ही शुरू हो सकता है, जो मानसून की वर्षा को कम कर सकता है। मौसम विभाग ने अपनी एडवाइजरी में नागरिकों से दोपहर के समय सीधी धूप से बचने और तरल पदार्थों का अधिक सेवन करने का आग्रह किया है।

अगले 48 घंटों के दौरान मौसम का हाल मिला-जुला रहने वाला है। एक ओर जहाँ हरियाणा, दिल्ली, बिहार और झारखंड में लू का प्रकोप जारी रहेगा, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों और राजस्थान के कुछ हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश की संभावना है। शनिवार को राजस्थान के राजसमंद में ओलावृष्टि और बिहार के सुपौल व मधुबनी में तेज बारिश ने तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की, जिससे स्थानीय निवासियों को तात्कालिक राहत मिली।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भी गर्मी का असर दिखाई दे रहा है। ऊना में पारा 42 डिग्री के पार जा चुका है, जबकि उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में बर्फबारी की खबरें आई हैं। पंजाब के 10 जिलों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर बना हुआ है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्री-मानसून की गतिविधियां तेज नहीं होतीं, तब तक मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी और ‘वार्म नाइट’ की स्थिति से राहत मिलने की उम्मीद कम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button